सभी भारतीयों की मातृभाषा हिंदी की कद्र करनी चाहिए। लोगों पर पश्चिमीकरण इतना हावी हो गया है कि हम हिंदी का मूल्य भूल गए हैं। वैश्विक स्तर पर अंग्रेजी की तरह हिंदी को महत्व दिलाने के प्रयास होने चाहिए। हिंदी एक ऐसी भाषा, जैसी बोली जाती है, वैसी लिखी जाती है। यह कहना है उन प्रतिभावान स्कूली छात्राओं का जिन्होंने हिंदी में काफी बेहतर प्रदर्शन किए हैं।
डीएवी मौसम विहार स्कूल में 11वीं की छात्रा अंशिका डोगरा ने दसवीं में हिंदी में 97 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। वह हिंदी में ब्लॉग भी लिखती है। उसकी हिंदी भाषा पसंद करने की अलग ही कहानी है। वह बताती है कि पहली कक्षा में जो शिक्षिका जिस तरह से कहानी, कविता पढ़ाती थी, उससे वह काफी आकर्षित होती थी। हिंदी भाषा के प्रति वहीं से प्रेम जगा जो आज भी कायम है।
हिंदी प्रेम के कारण पहली बार भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। आठवीं कक्षा में उसे हिंदी विकास संस्थान की ओर से हिंदी प्रतिभा सम्मान मिला। स्कूल में हिंदी के प्रति प्रेम जगाने में उसके शिक्षकों की काफी भूमिका है। वह नई पीढ़ी को संदेश देते हुए कहतीं है कि पश्चिमी संस्कृति के कारण अपनी संस्कृति को नहीं भुलाएं। इंटरनेट पर उपलब्ध हिंदी खेल व हिंदी एप का प्रयोग करें। एक कहावत है कि जो चीज हमारे पास है हम उसकी कद्र नहीं करते, लेकिन अब युवा पीढ़ी को इसकी कद्र समझनी चाहिए।
अर्वाचीन स्कूल की 11वीं की छात्रा आन्या गुप्ता को दसवीं में हिंदी में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। वह कहती हैं हिंदी एक ऐसी भाषा है जो जैसी बोली जाती हैै, वैसी ही लिखी जाती है। हालांकि वैश्विक स्तर पर हिंदी को अंग्रेजी भाषा की तरह लाभ नहीं मिल पाता। वह कहती हैं कि अंग्रेजी की तरह ही हिंदी का भी भविष्य अच्छा हो सकता है। बस वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा को अलग पहचान मिलनी चाहिए। हिंदी के प्रति रुचि जगाने के लिए वह युवा पीढ़ी को हिंदी समाचार पत्र पढ़ने की सलाह देती है।