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'जांच हवा में नहीं, ठोस सबूत हैं': ED का दावा, हमारे पास दिए गए नोटों की फोटो; सीएम केजरीवाल ने रखा अपना पक्ष

Thu, 20 Jun 2024 07:39 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि हमारे पास रिश्वत के तौर पर दिए गए नोटों की फोटो है। वहगीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष ने कहा कि  ईडी कुछ राजनीतिक आकाओं के हाथों में खेल रही है।
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय ने बृहस्पतिवार को आबकारी नीति पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर विरोध जताते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि वह हवा में जांच कर रही है। हमारे पास ठोस सबूत हैं। उनके पास नोटों की तस्वीरें हैं, जो रिश्वत के तौर पर दिए गए पैसे का हिस्सा थे। इसके अलावा गोवा में सात सितारा होटल में केजरीवाल के ठहरने का भुगतान रिश्वत के पैसे से किया गया था। वहीं, केजरीवाल ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि ईडी एक स्वतंत्र एजेंसी नहीं, बल्कि कुछ राजनीतिक आकाओं के हाथों में खेल रही है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

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केजरीवाल की याचिका पर फैसला सुरक्षित
राउज एवेन्यू कोर्ट के न्यायाधीश नियाय बिंदु ने साथ ही केजरीवाल की उस याचिका पर भी अपना फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें उन्होंने जेल में अपनी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिए मेडिकल जांच के दौरान अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल को वर्चुअल कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की है।

शराब कारोबारियों को पहुंचाया लाभ
केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में कथित तौर पर रिश्वत के रूप में धन लेने की साजिश का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप लगाया है कि इन खामियों का उद्देश्य कुछ शराब विक्रेताओं को लाभ पहुंचाना था और प्राप्त रिश्वत का कथित तौर पर गोवा में आप के चुनाव अभियान के लिए इस्तेमाल किया गया था। केजरीवाल ने आरोपों से इन्कार करते हुए ईडी पर जबरन वसूली का रैकेट चलाने का आरोप लगाया है।

ईडी ने केजरीवाल के दावे का किया विरोध
बृहस्पतिवार को ईडी की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने जमानत याचिका के साथ-साथ केजरीवाल के इस दावे का भी विरोध किया कि आबकारी नीति मामले में केंद्रीय एजेंसी के आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई धन का निशान या सबूत नहीं है।

केजरीवाल ने फोन का पासवर्ड देने से किया इनकार
राजू ने यह भी तर्क दिया गया कि केजरीवाल के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है, क्योंकि वह अपने मोबाइल फोन के बारे में गुप्त रख रहे थे। एएसजी ने कहा प्रतिकूल निष्कर्ष इसलिए निकाला जाना चाहिए, क्योंकि केजरीवाल ने अपना पासवर्ड देने से इन्कार कर दिया है। अगर वह अपना फोन दे देते हैं, तो बहुत सारे रहस्य सामने आ जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि केजरीवाल पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, भले ही वह व्यक्तिगत रूप से किसी अपराध में शामिल न हों। एएसजी राजू ने इस संबंध में कहा आपने भले ही अपराध न किया हो, लेकिन आप आप के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं और अगर आप किसी अपराध के लिए दोषी है, तो आप भी अपराध के लिए दोषी हैं। यह पीएमएलए की धारा 70 के अनुसार है। सभी जानते हैं कि आप के मामलों के लिए एक व्यक्ति जिम्मेदार है और वह अरविंद केजरीवाल हैं।
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ईडी के पास कोई सबूत नहीं : बचाव पक्ष
वहीं, केजरीवाल की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा ईडी के आरोपों का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया क्या ईडी एक स्वतंत्र एजेंसी है या कुछ राजनीतिक आकाओं के हाथों में खेल रही है? ईडी अपने सभी निष्कर्ष परिकल्पना के आधार पर निकालती है यदि वे अभी भी सामग्री एकत्र कर रहे हैं तो यह एक अंतहीन जांच है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को किसी अन्य व्यक्ति के समान स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। केजरीवाल ने कहा मेरे साथ किसी खास व्यक्ति की तरह व्यवहार न करें। मैं नहीं चाहता कि मेरे साथ किसी खास व्यक्ति की तरह व्यवहार किया जाए। लेकिन मेरे साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप किसी सामान्य व्यक्ति के साथ करते हैं।
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