लोकसभा में बृहस्पतिवार को ई-रिक्शा विधेयक को मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही बैटरी चालित इस वाहन के लिए लाइसेंस दिए जाने का रास्ता साफ हो गया। मुख्य रूप से दिल्ली में चलने वाले ई-रिक्शा को लेकर सरकार ने विपक्ष के सुझावों को कानून में शामिल करने का भी आश्वासन दिया है।
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में कहा कि यह एक संशोधित विधेयक है। यदि बिल पारित होता है तो आपके (सदस्यों) द्वारा सुझावों को शामिल कर लिया जाएगा। विपक्षी सांसद मोटर वाहन संशोधन विधेयक, 2014 को स्थायी समिति के पास समीक्षा के लिए भेजने की मांग कर रहे थे।
बहस में गडकरी ने प्रदूषण मुक्त भारत और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि सरकार ई-बस की योजना बना रही है। प्रस्ताव पर विचार-विमर्श हो रहा है और जल्द ही इसे संसद के समक्ष पेश किया जाएगा।
ई-रिक्शा पर बिल लाकर संभावित दिल्ली चुनाव में राजनीतिक फायदा उठाने के आरोपों को नकार हुए उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द इसका समाधान इसलिए करना चाह रही है क्योंकि इससे लाखों रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी जुड़ी है। गडकरी ने कहा कि सरकार ने कम ब्याज पर रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए कर्ज देने का भी निर्णय लिया है।
संसद में भी ई-रिक्शा चलाने का सुझाव
संसद परिसर में प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से बैटरी से संचालित ई-रिक्शा चलाने की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है। यह सुझाव केंद्रीय शहरी विकास मंत्री और संसदीय मामलों के मंत्री एम वेंकैया नायडू ने लोकसभा ई-रिक्शा से संबंधित विधेयक पेश होने के मौके पर दिया।
नायडू ने मजाकिया लहजे में कहा कि यदि ई-रिक्शा संसद परिसर के भीतर चलाया जाएगा तो वह और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए साथ-साथ आ सकेंगे। सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने भी नायडू की इस मांग का समर्थन किया।