नक्सलियों के लिए काम करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए डीयू शिक्षक डॉ. जीएन साईंबाबा के समर्थन में दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) आगे आया है।
डूटा ने साईंबाबा की गिरफ्तारी को मानवाधिकार हनन बताते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। डूटा का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बेहद गलत तरीके से गिरफ्तार किया है। डूटा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
गिरफ्तारी के दो दिन बार डूटा ने रविवार को अधिकारिक बयान जारी कर डॉ. जीएन साईंबाबा का समर्थन किया है। डूटा ने कहा कि पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर उन्हें गिरफ्तार किया है।
डूटा का कहना है कि साईंबाबा एक अच्छे शिक्षक हैं। पहले भी पुलिस उन पर यह आरोप लगाती रही है। तब साईंबाबा ने कहा था कि वह जांच के लिए हर तरह का सहयोग करेंगे। फिर उन्हें सड़क पर एक अपराधी की तरह गिरफ्तार क्यों किया गया।
डूटा का कहना है कि पुलिस ने शारीरिक रुप से अशक्त शिक्षक पर अनैतिक तरीके से कार्रवाई की है। इससे पहले भी पुलिस ने उनके लिए हाउस अरेस्ट जैसी स्थिति पैदा की थी। उस समय भी उन्हें कोई सबूत नहीं मिला। तब भी साईंबाबा ने जांच में मदद की बात कही थी।
डूटा ने सभी कॉलेज प्रबंधनों और डीयू प्रशासन से इस मामले में मिलकर हस्तक्षेप करने और सुनिश्चित करने की मांग की है कि साईंबाबा को अपने पक्ष रखने का पूरा अधिकार मिले।