डीटीसी बसों में बेटिकट यात्रा करते यात्रियों के पकड़े जाने पर कंडक्टर के खिलाफ हो रही कार्रवाई के विरोध में कर्मचारी लामबंद होने लगे हैं। यूनियन ने कंडक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने को गलत करार दिया है। यूनियन ने प्रबंधन से संबंधित आदेश वापस लेने की भी मांग की थी, लेकिन प्रबंधन ने अनसुना कर दिया।
अब यूनियन विरोध जताने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। हजारों करोड़ के घाटे में डूबी डीटीसी को उबारने के लिए प्रबंधन ने दिसंबर 2013 में बिना टिकट यात्री के साथ-साथ उक्त बस के कंडक्टर की भी चालान पर्ची काटने का आदेश जारी किया था। इसके तहत कंडक्टर की प्रति सवारी 75 रुपये की पर्ची काटी जा रही है।
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कंडक्टर की चालान पर्ची की प्रतिदिन डिटेल उनके डिपो मैनेजर को भेजी जा रही है, ताकि महीने के आखिर में उनके वेतन से चालान की राशि काटी जा सके। बताया जा रहा है कि आदेश लागू होने के बाद से तीन महीनों में अधिकतर कंडक्टरों का पांच हजार से अधिक चालान पर्ची कट चुकी है।
कई कंडक्टर के वेतन से लगभग तीन हजार रुपये से अधिक राशि चालान में कट चुकी है। डीटीसी प्रबंधन ने वर्ष 2012 में भी इस आदेश को लागू किया था, लेकिन विरोध के बाद शीला सरकार ने उसे वापस लेने का निर्देश कर दिया था।
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डीटीसी एंप्लाइज कांग्रेस के अध्यक्ष रमेश चंद वत्स के मुताबिक प्रबंधन बिना टिकट यात्रा करने पर यात्री के साथ कंडक्टर का चालान नहीं काट सकता। क्योंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में एक ही गलती पर दो चालान नहीं काटे जा सकते।