सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों ने इंडिका कार चालक गुरविंदर से तुगलक रोड थाने में तीन घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में किसी आपराधिक षड्यंत्र और जानबूझकर एक्सीडेंट किए जाने की कोई बात सामने नहीं आई है।
सुरक्षा एजेंसियों ने उसे क्लीन चिट दे दी है। वहीं, पुलिस को दुर्घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला है। पुलिस ने गुरविंदर की मेडिकल जांच भी कराई है, जिससे पता चल सके कि कहीं उसने रात में शराब तो नहीं पी थी।
कोर्ट ने पांच मिनट में ही दे दी थी जमानत
सुरक्षा एजेंसियों से पहले इस मामले में आरोपी ड्राइवर को मात्र पांच मिनट चली सुनवाई में जमानत दे दी गई थी।
सुनवाई कर रहे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पुनीत पाहवा ने कहा कि गुरविंदर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279 व 304ए के तहत लापरवाही से वाहन चलाने व लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया है दोनों ही धाराएं जमानती हैं, ऐसे में उसे जेल नहीं भेजा जा सकता।
अदालत ने पुलिस के उस तर्कको खारिज कर दिया कि जिसमें कहा गया कि आईबी व स्पेशल सेल मामले की जांच कर रही है कि कहीं दुर्घटना के पीछे कोई षड्यंत्र तो नहीं है।
नहीं पता लगेगा हादसे का कारण
गोपीनाथ मुंडे की कार का जिस जगह हादसा हुआ है, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। ऐसे में तुगलक रोड थाना पुलिस को यह पता करना मुश्किल होगा कि गलती किसकी थी।
दिल्ली पुलिस की एफएसएल को मौके पर बुलाया गया था। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग सकेगा कि किस गाड़ी ने रेड लाइट जंप की थी।