दिल्ली में ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया है। सरकार की ओर से दिए गए हलफनामे में 650 से 1000 वाट के ई-रिक्शा को चलाने की इजाजत मांगी गई है। इस पर अभी कोर्ट ने कहा कि बिना किसी कानून के ई रिक्शा चलने देना खतरे से खाली नही है। इस पर सोमवार तक के लिए रोक लगा दी है।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि ई-रिक्शा को मोटर एक्ट में रखा जाएगा और उन्हें सिर्फ चार सवारियां बैठाने की ही इजाजत होगी।
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने बैटरी रिक्शा कल्याण संघ की ओर से दायर साचिका पर सुनवाई करते हुए ई-रिक्शा के परिचालन पर 8 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी थी।
स्पीड लिमिट भी तय की गई
हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे में कहा गया है कि ई-रिक्शा चालकों के लिए स्पीड लिमिट भी तय कर दी गई है। कोई भी चालक 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा ई-रिक्शा नहीं दौड़ाएगा।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन जरूरी है और वह 50 किलो से ज्यादा वजन लेकर नहीं चल सकता।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा लोगों की जान के लिए खतरा हैं और बिना किसी उचित गाइडलाइन के इसका परिचालन अवैध है।
पिछली सुनवाई में दिया था आदेश
संघ के अधिवक्ता आरके कपूर ने पिछली सुनवाई न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष याचिका पेश की। उन्होंने याचिका पर न्यायिक हित में जल्द से जल्द सुनवाई करने का आग्रह करते हुए खंडपीठ से अपने 31 जुलाई को प्रतिबंध लगाने संबंधी फैसले की पुन: समीक्षा करने को कहा था।
खंडपीठ ने सुनवाई करने की हामी भरते हुए कहा कि राजधानी में ई-रिक्शा चलाने के लिए उसका नियमन करना जरूरी है। आप यातायात के नियमों को अच्छी तरह से जानते हैं।
खंडपीठ ने याची से पूछा कि जब तक ई-रिक्शा को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक उसे चलाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।