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चारों पैर न होने के बाद भी चलेगा ब्रेव डॉग! कैसे पूरा होगा ये अनोखा चैलेंज

Mon, 16 Mar 2020 04:31 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • डेढ़ महीने की उम्र में किसी ने ब्रेव के काट दिए थे चारों पैर
  • अब अपने पैरों पर चल सकेगा ब्रेव
  • सैमसंग कंपनी में इंजीनियर थीं मालबिका
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Brave Dog - फोटो : AmarUjala
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विस्तार
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ब्रेव डॉग की उम्र लगभग ढाई साल है। लगभग डेढ़ महीने की उम्र से ही उसके चारों पैर नहीं हैं। वह बिस्तर पर पड़े-पड़े ही जीने और खेलने का अभ्यस्त हो चुका है। लेकिन उसकी मालकिन को ये पसंद नहीं है कि वह इस तरह की जिंदगी जिए। वे चाहती हैं कि ब्रेव सामान्य कुत्तों की तरह चल सके और एक जगह से दूसरी जगह अपने बल पर आ-जा सके।
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इसके लिए उन्होंने एक एक्सपर्ट के माध्यम से उसे रविवार को चारों कृत्रिम पैर (प्रोस्थेटिक) लगवाने का काम किया है। डॉक्टर की कोशिश है कि ब्रेव जल्दी ही चल सके। हालांकि इसमें लगभग साल भर तक का समय लग सकता है और इसके लिए फिजियोथेरेपी के कड़े रुटीन का पालन करना पड़ेगा।

ब्रेव की मालकिन मालबिका ने अमर उजाला को बताया कि मार्च 2018 में चंडीगढ़ की उनकी एक दोस्त ने उन्हें फोन कर बताया था कि डेढ़ महीने के ब्रेव के चारों पैर काटकर किसी ने सड़क पर फेंक दिया है। वे उसे लेने चंडीगढ़ गईं। उसे लाकर दिल्ली के अपने घर में रखा। काफी देखभाल के बाद उसकी जान तो बच गई, लेकिन ब्रेव अपनी जगह से कहीं जा नहीं पाता था। इससे उन्हें बड़ा दुख होता था।

पशुओं को भी कृत्रिम अंग लगाए जाने की बातें उन्होंने समाचार माध्यमों में सुनी थीं। इसे देखते हुए उन्होंने स्पेन और अमेरिका के कुछ पशु विशेषज्ञों से संपर्क किया, लेकिन अलग-अलग वजहों से यह संभव नहीं हो सका। अंततः वे राजस्थान सरकार के एनीमल हसबैंडरी विभाग में कार्यरत डॉक्टर तपेश माथुर के संपर्क में आईं। कृष्णा लिंब्स से जुड़े डॉक्टर तपेश ने रविवार को ब्रेव को चारों कृत्रिम पैर लगा दिए। उनकी उम्मीद है कि ब्रेव कुछ समय बाद अपने पैरों पर चल सकेगा।

 

कृत्रिम अंग लगाने के समय डॉ. तपेश और ब्रेव - फोटो : AmarUjala

ये हैं चुनौतियां

डॉ. तपेश माथुर के मुताबिक ब्रेव अभी तक जमीन पर पड़े-पड़े अपनी जिंदगी गुजारता रहा है। ऐसे में सबसे पहली कोशिश उसे खड़े होने की ट्रेनिंग देने की होगी। इसके बाद उसकी फिजियोथेरेपी की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें सामान्य कुत्तों की तरह उसे अपने पैरों को उठाकर आगे रखने की ट्रेनिंग दी जाएगी। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से कृत्रिम अंग लगाने के लिए सम्मानित किए जा चुके डॉ. तपेश ने बताया कि अगर ट्रेनिंग सही तरीके से हो सकी और सब कुछ सामान्य रहा तो ब्रेव कुछ समय बाद अपने पैरों पर चल सकेगा।

 

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Dog Lover Malbika - फोटो : AmarUjala

बेजुबानों के लिए छोड़ दी इंजीनियरिंग 

दिल्ली की मालबिका (40 वर्ष) सैमसंग कंपनी में एक इंजीनियर के तौर पर काम करती थीं। एक भयंकर बीमारी में अपने कुत्ते की मौत के बाद उन्होंने इन बेजुबानों की सेवा को ही अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया।

उनकी कुत्तों की इस सेवा में अनेक लोग रोड़े भी खड़े करते हैं, कॉलोनी के लोग गंदगी होने के नाम पर उनकी शिकायत भी करते हैं। कई बार यह मामला अप्रिय स्थिति तक भी पहुंच जाता है। लेकिन इन बेजुबानों की खुशी के लिए उन्होंने अपना पूरा समय इसी काम में लगा दिया है। 

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