टीम ने ट्यूमर को हटाने और एड्रिनल ग्लैंड के सामान्य हिस्से को बचाने की योजना बनाई, क्योंकि एड्रिनल ग्लैंड हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग हैं। ये स्टेरॉयड का निर्माण करते हैं और रक्त-चाप को सामान्य बनाए रखते हैं। टीम ने इसे मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का उपयोग करके की-होल सर्जरी द्वारा ठीक किया।
यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय शर्मा के मुताबिक, ट्यूमर का एड्रिनल ग्लैंड में अति कठिन जगह में स्थित होने के कारण उसे ऑपरेट करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। ये ग्लैंड छोटे और त्रिकोणीय आकार के होते हैं, जो दोनों किडनी (गुर्दों) के ऊपर स्थित होते हैं। ये प्रमुख रक्त धमनियों के बहुत ही नजदीक स्थित होते हैं, जो ऑपरेशन के दौरान रक्त-चाप एवं हृदय गति में उतार-चढ़ाव होने की वजह से जीवन के लिए बहुत अधिक खतरा भी पैदा कर सकते हैं। बाएं एड्रिनल ट्यूमर को हटाने के लिए मनन की दो घंटे की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में 50 मिली खून की क्षति के साथ उसके ट्यूमर को हटा दिया गया और सामान्य एड्रिनल ग्लैंड को बचा लिया गया।
वहीं, दिशा का रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन किया गया। उसकी दाहिनी एड्रिनल ग्लैंड में स्थित 5.5 सेंमी वाले ट्यूमर को पूरी तरह से हटा दिया गया। बाएं एड्रिनल ग्लैंड में स्थित 2.5 सेंमी वाले ट्यूमर को सामान्य ग्लैंड से अधिक से अधिक हटा दिया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, भाई-बहनों के जेनेटिक अध्ययन से एक दुर्लभ पारिवारिक ट्यूमर सिंड्रोम का पता चला है, जिसे वीएचएल सिंड्रोम कहा जाता है। यह दुर्लभ सिंड्रोम पूरे शरीर में ट्यूमर बना सकता है।