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नोएडा में डॉक्टरों की हड़ताल का असर: कोरोना के अलावा सभी सेवाएं रही बंद, मरीजों को हुई समस्या 

Fri, 11 Dec 2020 05:50 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
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नोएडा में डॉक्टरों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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आयुर्वेदिक डॉक्टरों को ऑपरेशन की अनुमति दिए जाने से नाराज इंडियन मेडिकल एसोसिएन के एलोपैथिक डॉक्टरों का विरोध पूरे देश में देखने को मिल रहा है। इसका असर शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में भी देखने को मिला। यहां प्राइवेट एलोपैथिक डॉक्टरों ने इमरजेंसी और कोविड सेवाएं छोड़कर सभी सेवाएं बंद रखीं। 

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प्राइवेट अस्पतालों में तो इस बंद का असर देखने को मिला। जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि जिला अस्पताल में हड़ताल का प्रभाव देखने को नहीं मिला। यहां मरीजों की भीड़ सामान्य ही रही। 

हड़ताल का समर्थन करने पहुंचे डॉक्टरों ने कहा कि आज हम आईएमए हाऊस में हड़ताल के समर्थन में जमा हुए हैं। हम सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हैं कि आज वे हड़ताल के समर्थन में यहां आए और सहयोग किया।
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इस मौके पर डॉ. एनके शर्मा, डॉ. अजय कुमार, डॉ. प्रकाश जैन, डॉ. नवदीप कुमार, डॉ. नरेंद्र त्यागी, डॉ. एसएस रावत, डॉ. निशिकांत, डॉ. मनोज वाजपेयी, डॉ. भारद्वाज, डॉ. पाठक और डॉ. सुभाष गुप्ता भी मौजूद थे।  

आयुर्वेदिक डॉक्टर बोले, एकाधिकार चाहते हैं एलोपैथिक डॉक्टर
एमबीबीएस डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से सर्जरी के लिए एलोपैथी में प्रशिक्षण मिला है, ठीक उसी तरह आयुर्वेदिक डॉक्टरों को भी प्रशिक्षण दिया जाए, नहीं तो इससे लोगों को नुकसान होगा। वहीं, आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का कहना है कि एलोपैथी डॉक्टर एकाधिकार चलाना चाहते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा सर्जरी होने से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। इस बारे में अमर उजाला ने कुछ डॉक्टरों से बातचीत की। 

तीन वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाए 
 जिस तरह से एमबीबीएस डॉक्टर सर्जरी के लिए प्रशिक्षण लेते हैं। ऐसे ही आयुर्वेदिक डॉक्टरों को तीन वर्ष प्रशिक्षित किया जाए। इसके बाद इन्हें अनुमति प्रदान की जाए। 
 डॉ. अनुज जैन, एमबीबीएस बाल रोग विशेषज्ञ

हजारों वर्ष पुरानी है आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा
आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा हजारों वर्ष पुरानी है। इसका उल्लेख वेदों में भी मिलता है। शल्य चिकित्सा के जनक महर्षि सुश्रुत को माना जाता है। परास्नातक कोर्स में सभी शल्य चिकित्सा के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है। 
डॉ. साक्षी, एमडी आयुर्वेद काय चिकित्सा ईशान कॉलेज

मरीजों को होगा नुकसान 
एलोपैथी में बेहद आधुनिक तरह से रिसर्च पर आधारित शल्य चिकित्सा को मंजूरी दी जाती है। यदि सरकार मिक्सोपैथी को मंजूरी देती है तो यह मरीजों के लिए नुकसानदेह होगा। 
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डॉ. प्रदीप सिंह, एमडी एलोपैथी और ग्रेनो आईएमए अध्यक्ष

सरकार ने आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा को मान्यता देकर बड़ा काम किया है। इससे मेडिकल क्षेत्र में क्रांति आएगी। 
डॉ. डीके गर्ग, चेयरमैन ईशान कॉलेज

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