एंटीबायोटिक की नहीं होती जरूरत
एम्स में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. पूर्वा माथुर व ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. कामरान फारूक ने कहा कि वायरल में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती बावजूद इसके देखा जा रहा है कि कुछ डॉक्टर वायरल में भी एंटीबायोटिक दवा दे रहे हैं जो मरीजों की समस्या को बढ़ा देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों के लिए सलाह जारी की गई है कि वह वायरल में एंटीबायोटिक न लें।
ताजा और पौष्टिक भोजन करें
आने वाले दिनों में बुजुर्ग, छोटे बच्चे और बीमार लोगों को विशेष ध्यान रखना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से तीन सप्ताह में एक बार फिर से वायरल का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, वह आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं। ऐसे मरीजों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ताजा व पौष्टिक भोजन करना चाहिए। साथ ही फल व सब्जियां (मौसमी व हरे पत्तेदार सब्जियां) खानी चाहिए।
वायरल की प्रकृति में बदलाव
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से वायरल की प्रकृति में बदलाव देखा जा रहा है। सामान्य दिनों में वायरल पांच दिन तक रहता है, लेकिन पिछले कुछ माह से वायरल का प्रकोप दो से तीन सप्ताह तक देखा जा रहा है। इसके अलावा पोस्ट वायरल इंफेक्शन भी मरीजों को परेशान कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस समय के साथ हमारे शरीर के साथ अपने स्वरूप में बदलाव करता है। शरीर भी उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता था, लेकिन पिछले कुछ साल में इनकी चेन टूटी है, जिस कारण वायरस ज्यादा प्रभावी होकर आसानी से लोगों को परेशान कर रहा है। इसके अलावा लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हुई है।