डेंगू को लेकर लोगों में दहशत है लेकिन कई ऐसे लोग भी हैं, जो घबराए नहीं। जिला अस्पताल में डेंगू के मरीज फ्ल्यूड, पानी, जूस और सूप से ही फिट हो गए।
ईएसआई और निजी अस्पतालों में डेंगू रोगी दम तोड़ रहे हैं, जबकि जिला अस्पताल में डेंगू से एक भी रोगी की मौत नहीं हुई है। जिला अस्पताल में मेडिसिन विभाग में इस माह करीब 2000 रोगी भर्ती किए गए।
319 डेंगू रोगियों का इलाज किया गया, जिनमें से करीब 160 को भर्ती किया गया। इनमें से केवल एक रोगी को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ी। रूटीन जांच के लिए ओपीडी में पहुंचे 32 साल के सोनू ने बताया कि उनमें प्लेटलेट्स गिरकर 35 हजार तक पहुंच गए थे।
इस इलाज से एक लाख से अधिक प्लेटलेट्स हो गई
अस्पताल में फ्ल्यूड चढ़ाया गया। साथ ही फलों का जूस, पानी, नारियल का पानी, प्रोटीन से भरपूर खाना खाने की सलाह दी गई। प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ी और इनसे एक लाख से अधिक प्लेटलेट्स हो गई।
वहीं, 40 साल के राजीव ने बताया कि निजी अस्पताल ने प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह दी थी। प्लेटलेट्स 28 हजार हो गए थे। रुपये न होने के कारण जिला अस्पताल में भर्ती हुए।
यहां ग्लूकोज और फ्ल्यूड चढ़ाया गया। साथ ही पानी, फलों का जूस, सूप और नारियल पानी से प्लेटलेट्स चार दिन में 80 हजार हो गए। अब फिट हूं और अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।
दाल, पनीर, अंडा आदि को भी खाने से मिलती है मदद
वहीं डॉक्टर रेनू अग्रवाल कहना है कि डेंगू में प्लेटलेट्स टूटने पर रक्त कोशिकाओं मे प्लाज्मा की कमी हो जाती है। लोग बकरी के दूध को डेंगू का इलाज मान रहे हैं।
इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। पानी, नारियल का जूस, सूप, फलों का जूस, दाल का पानी आदि पीने से शरीर में प्लाज्मा की मात्रा बढ़ती है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन संतराम के मुताबिक 160 रोगियों में से सिर्फ एक रोगी को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ी। बाकी रोगी फ्ल्यूड और अन्य तरल पदार्थों से फिट हो गए। निजी अस्पतालों में रुपये कमाने के लिए तुरंत मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ा दिए जाते हैं। डेंगू रोगी प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दाल, पनीर, अंडा आदि का सेवन भी करें।