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केंद्र ने शीला के करीबी अफसर को बनाया मुख्य सचिव

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केंद्र सरकार के दबाव के चलते जहां केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है वहीं दिल्ली की नौकरशाही में भी बड़ा फेरबदल होता नजर आ रहा है।
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आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार में मुख्य सचिव बनाकर दिल्ली लाए गए एसके श्रीवास्तव को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह इनसे पूर्व मुख्य सचिव रहे दीपक मोहन स्पोलिया को वापस दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया है।

एसके श्रीवास्तव 1980 बैच के आईएएस हैं जबकि दीपक मोहन स्पोलिया 1979 बैच के आईएएस अफसर हैं। स्पोलिया अभी दिल्ली के वित्त आयुक्त पद पर हैं। अरविंद केजरीवाल सरकार में लाए गए कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी जल्द बदला जा सकता है।
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‘अमर उजाला’ से दीपक मोहन स्पोलिया ने कहा कि आदेश की कॉपी मुझे मिल गई है। गुरुवार को मुख्य सचिव का पद ग्रहण करूंगा। बाकी यह पूछे जाने पर कि एसके श्रीवास्तव को क्या जिम्मेदारी मिली है, उन्होंने कहा अभी इस बारे में जानकारी नहीं है।

राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है ये बदलाव

इस बदलाव को सीधे तौर पर राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री रहते तीन लोगों के पैनल में शीला दीक्षित ने स्पोलिया को तरजीह दी थी।

इसके बाद उसी बैच के आईएएस अधिकारी शक्ति सिन्हा ने इस्तीफा दे दिया था। फिर भाजपा के विधायकों को मुलाकात का समय नहीं देने का आरोप भी एसके श्रीवास्तव पर लगाया गया है।

आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो अरविंद केजरीवाल ने एसके श्रीवास्तव को मुख्य सचिव बना दिया गया। केजरीवाल ने उस समय तर्क दिया था कि स्पोलिया कांग्रेस के प्रति वफादार हैं। ट्रांसपोर्ट फिटनेस घोटाले में भी इनका नाम जुड़ा है। हालांकि अब केंद्र में भाजपा की सरकार है और फिर से पूर्व मुख्य सचिव को वापस लाया गया है।
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तो स्पोलिया को मिला है ये इनाम?

डीएम स्पोलिया को फिर से मुख्य सचिव का जिम्मा सौंपे जाने पर भाजपा नेता यह तर्क दे रहे हैं कि भाजपा को काम कराने हैं। किसी तरह के कानूनी गलत काम का आरोप भी स्पोलिया पर नहीं है।

वहीं एसके श्रीवास्तव उसे रोक रहे थे। इसलिए गत शनिवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर हटाए जाने की मांग करके आए थे। अभी जल बोर्ड सीईओ विजय कुमार, शहरी विकास सचिव राजेंद्र कुमार समेत केजरीवाल के समय में लाए गए कुछ अन्य अधिकारी भाजपा की रडार में हैं। फिर नए मुख्य सचिव अपने हिसाब से टीम भी तय कर सकते हैं।

सूत्र बताते हैं कि जहां बैठकों में अरविंद केजरीवाल का गुणगान करना एसके श्रीवास्तव के लिए भारी पड़ा, वहीं शीला दीक्षित के कार्यकाल में शुंगलू कमेटी, कैग और सीवीसी के आरोपों से राज्य सरकार को निकालकर लाने का पुरस्कार दीपक मोहन स्पोलिया को दिया गया है।
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