-मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र (फ्लड प्लेन) के सीमांकन को लेकर चल रहे विवाद पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (पर्यावरण) को एक सप्ताह में डीडीए व सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाकर मामला सुलझाने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान डीडीए ने बताया कि एनजीटी के 25 मार्च 2026 के आदेश पर वजीराबाद से ओखला बैराज तक 22 किमी क्षेत्र में सीमांकन चल रहा था। 277 में से 206 बोलार्ड लगाए जा चुके थे, लेकिन छह जून को सिंचाई विभाग ने संशोधित नक्शा भेजा, जिससे काम रोकना पड़ा। डीडीए ने कहा कि नए नक्शे पर काम करने पर पुराने बोलार्ड हटाने पड़ सकते हैं।
पीठ ने कहा कि सीमांकन 1:100 वर्ष बाढ़ सीमा जैसे वैज्ञानिक मानकों पर होना है और जब काम इन्हीं मानकों पर शुरू हो चुका था, तो संशोधित नक्शा भेजने का कारण सिंचाई विभाग को स्पष्ट करना होगा। डीडीए को अगली सुनवाई 18 सितंबर से एक सप्ताह पहले प्रगति रिपोर्ट देने को कहा है, वहीं सिंचाई विभाग को शपथ पत्र के साथ अपना पक्ष दाखिल करना होगा।