संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का अपनी मांगों को लेकर पिछले एक साल से चल रहा आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है।
राजधानी दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र-छात्राएं यूपीएससी के नए पाठ्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। पिछले एक साल से चल रहा ये विरोध प्रदर्शन और आंदोलन बीते कुछ दिनों से अचानक और तेज हो गया। इसके पीछे कई वजहें हैं।
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ है सीसैट। यूपीएससी के नए पाठ्यक्रम के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा में सीसैट अनिवार्य कर दिया गया है। सीसैट क्या है और यह विवाद इतना क्यों बढ़ गया जानिए पूरी कहानी।
क्या है सीसैट?
यूपीएससी ने साल 2010 में सिविल सेवा परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए सीसैट लागू किया। सीसैट के लागू होने के बाद छात्रों को प्रारंभिक परीक्षा में अब किसी एक वैकल्पिक विषय का चुनाव नहीं करना होगा।
इसके स्थान पर छात्रों को सामान्य अध्ययन के अलावा एप्टीट्यूड का एक जैसा ही पेपर देना होगा।
यह पाठ्यक्रम स्टैटिक्स और अंग्रेजी माध्यम पर ज्यादा जोर देता है। इसी का हिंदी व अन्य भाषा के छात्र विरोध कर रहे हैं।
सीसैट पर हंगामा क्यों?
सीसैट को साल 2011 में पूरी तरह हर परीक्षा में लागू कर दिया गया था। तभी से इसका विरोध शुरू हो गया। हालांकि पहले यह विरोध बहुत थोड़े में सीमित था लेकिन इस साल मई में जब यूपीएससी का रिजल्ट आया तो उसके बाद छात्रों ने सीसैट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
दरअसल, यूपीएससी ने अपने सीसैट के रूप में पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किया है जिससे ग्रमीण और मानवीकी पृष्ठभूमि के छात्रों के साथ हिंदी व अन्य माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों के चयन में काफी गिरावट दर्ज की गई है।
अब हाल यह हो गया है कि 2013 के यूपीएससी के रिजल्ट में 1122 लोगों का चयन हुआ है जिसमें हिंदी माध्यम के छात्रों की संख्या केवल 26 है।
6 जुलाई को शुरू हुआ आमरण अनशन
यूपीएससी का रिजल्ट आने के बाद देशभर में छात्रों ने सीसैट के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी। दिल्ली स्थित मुखर्जी नगर में 50 से अधिक छात्र जिसमें 20 लड़कियां भी शामिल थीं, 6 जुलाई को आमरण अनशन पर बैठ गए। बाद में नेताओं इस मामले में समिति बनाकर उचित कदम उठाने की बात करते हुए अनशन खत्म करने का आग्रह किया था।
इससे पूर्व करीब 15000 छात्र 27 जून को अपनी मांगों को लेकर रेसकोर्स भी गए थे, वहां सारी रात बैठे रहे लेकिन सरकार की तरफ से न तो कोई प्रतिनिधि इनकी बातों को सुनने आया न ही किसी प्रकार का आश्वासन ही उन्हें मिला। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगो को लेकर एकत्र हुए इन छात्रों को अंत में पुलिस ने गिरफ्तार कर वहां से हटा दिया जिनमे कई लड़कियां भी थीं।
छात्रों कहना है कि पाठ्यक्रम में बदलाव के बाद प्रारंभिक परीक्षा में शामिल किए गए सीसैट को हटाया जाए जिसका सीधा लाभ इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्रों को मिल रहा है। कई बार प्रदर्शन कर चुके छात्रों का कहना है कि उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं हैं क्योंकि हमारी बातों को कहीं नहीं सुना जा रहा है।
राजनाथ के घर तक पहुंचे थे छात्र
बीती 12 जुलाई को यूपीएससी की परीक्षा में अंग्रेजी की तुलना में हिन्दी की उपेक्षा किए जाने से जुड़ा मामला गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर तक पहुंच गया। 12 जुलाई को जब गृहमंत्री अपने आवास से निकल रहे थे तभी यूपीएससी के प्रतियोगियों ने उनके आवास के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इस दौरान छात्र-छात्राओं ने जमकर नारेबाजी भी। छात्र-छात्राओं ने कहा कि यूपीएससी परीक्षा में हिन्दी पट्टी को प्रतियोगियों की अनदेखी की जा रही है, जबकि अंग्रेजी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं से मिलने पहुंचे गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से चर्चा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के समक्ष रखेंगे। यही नहीं, उन्होंने इस मामले में छात्रों का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर निर्णय कराने की मांग करने का भी आश्वासन दिया था।
पहले भी गिरफ्तार हुए हैं छात्र
लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद भी जब बात नहीं बनी तो 21 जुलाई को एक बार फिर छात्रों ने एक बार फिर संसद भवन के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ही वहां मौजूद सुरक्षा बलों ने उन्हें हटाने की कोशिश की पर जब छात्र नहीं माने तो सुरक्षा बलों ने करीब 300 यूपीएससी छात्रों को हिरासत में लिया।
चयन में इस गिरावट के लिए छात्र यूपीएसी की अंग्रेजी परस्ती को और प्रारंभिक परीक्षा में शामिल किए गए सीसैट को जिम्मेदार मान रहे हैं।
यूपीएससी की तैयारी कर रहे एक छात्र का कहना है कि सीसैट के कारण इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्रों काफी लाभ मिल रहा है जबकि मानविकी एवं हिंदी माध्यम के छात्र इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, इसलिए हम सीसैट को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग कर रहे हैं।
यही नहीं, मुख्य परीक्षा में जो अंग्रेजी क्वालिफाइंग का प्रश्न पत्र है उसे भी अन्य भारतीय भाषाओं के स्तर का बनाए जाने की मांग भी की जा रही है।
गलत होते हैं यूपीएससी के सवाल?
छात्रों का आरोप है कि यूपीएससी के प्रश्न जो मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किए जाते हैं उसका हिंदी अनुवाद काफी जटिल और कई जगहों पर गलत भी होता है। छात्रों की मांग है कि मूल प्रश्न पत्र हिंदी में ही तैयार किए जाएं।
यही नहीं, छात्र अगले महीने होने वाली प्रारंभिक परीक्षा की तिथि को भी आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं क्योंकि आंदोलन और अनशन के कारण उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
छात्रों का ये आंदोलन बीते तीन महीनों से लगातार जारी है।
क्यों भड़का छात्रों का गुस्सा?
छात्रों की मांग और आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आश्वासन दिया था कि सरकार यूपीएससी परीक्षार्थियों के साथ अन्याय नहीं होने देगी। उन्होंने कहा था कि इस विषय पर विचार करने के लिए 3 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट पेश करेगी उसके बाद ही फैसला हो सकेगा।
केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि इस बारे में कोई फैसला आने तक फिलहाल 24 अगस्त को होने वाली सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा स्थगित करने की मांग भी यूपीएससी से की गई है।
छात्रों ने भी यह मान लिया था कि फिलहाल परीक्षा नहीं होगी और पाठ्यक्रम में बदलाव होगा, लेकिन बृहस्पतिवार शाम जब यूपीएससी ने परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए तो छात्रों का गुस्सा भड़क गया।
इसके विरोध में छात्रों ने पहले मुखर्जीनगर के पास रिंग रोड को जाम कर दिया और जब पुलिस ने जाम खुलवाने की कोशिश में बल प्रयोग किया तो छात्रों ने पुलिस पर पथराव करते हुए जिप्सी और एक बाइक में आग लगा दी।
सरकार ने मांगा एक हफ्ते का समय
शुक्रवार को इस मुद्दे पर एक बार फिर छात्रों ने हंगामा किया और संसद मार्च का ऐलान किया। रेल भवन के पास दिल्ली पुलिस ने करीब 100 छात्रों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद संसद के अंदर और बाहर हंगामा शुरू हो गया।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में उठे सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यूपीएससी के पाठ्यक्रम के संबंध में गठित की गई समिति से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है।
समिति की रिपोर्ट आते ही इस मामले में सरकार उचित कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि वे छात्रों को समझाने की कोशिश करेंगे। एडमिट कार्ड जारी होने के मामले में उन्होंने कहा कि यह यूपीएससी के कैलेंडर के अनुसार जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी पार्टियों के सदस्यों को साथ लेकर इस मामले का हल निकालेगी।