सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को निठारी हत्याकांड मामले में श्रृंखलाबद्ध बलात्कार और हत्याओं को अंजाम देने वाले सुरिंदर कोली के मृत्युदंड को लागू किए जाने पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।
सर्वोच्च अदालत ने दोषी की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए अपने उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उसकी मौत की सजा पर मुहर लगाई गई थी।
जस्टिस एचएल दततू व जस्टिस एआर दवे की पीठ ने कहा कि सजा को लागू किए जाने पर रोक लगाने की मांग को अस्वीकार किया जाता है। कयोंकि पुनर्विचार याचिका दायर करने में 1153 दिनों की देरी हुई है और इसके पीछे की संतोषजनक वजह को स्पष्ट नहीं किया गया है।
इसके अलावा हमने पुनर्विचार याचिका और संबंधित दस्तावेजों पर भी गौर किया। उसमें भी कोई आधार नहीं है। पीठ ने कहा कि हमें ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि मौत सजा के आदेश में हस्तक्षेप करें। इसलिए अदालत पुनर्विचार याचिका को खारिज करती है।
कोर्ट ने कहा, यह भयावह और बर्बर है
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि देरी और पुनर्विचार याचिका में योग्यता नहीं होने, दोनों ही आधारों पर पीठ याचिका को अस्वीकार करती है। याद रहे कि हाल ही में 42वर्षीय कोली की दया याचिका को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अस्वीकार कर दिया था।
यूपी के नोएडा, निठारी में कोली पर नृशंसता से कई हत्याएं की और बच्चों की लाशों के टुकड़े भी किए। निचली अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई थी।
शीर्षस्थ अदालत ने 15 फरवरी, 2011 को 2005 में एक चौदह साल की लड़की की हत्या के मामले में कोली के मृत्युदंड को जारी रखा था। कोली की मौत की सजा को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह मामला भयावह और बर्बर था।
खुद बयां की थी अपनी हैवानियत
गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में आता है और दोषी के प्रति कोई दया नहीं दिखाई जा सकती। कोली के इकबालिया बयान पर अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने स्वेच्छा से अपराध कबूल किया है और इसमें किसी तरह की कोई कमी नहीं है।
याद रहे कि कोली ने अपने बयान में यह जिक्र किया था कि वह किस तरह से लड़कियों को बहलाता था और उन्हें बाद में मार देता था। इस मामले में गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने कोली को सबसे पहले मौत की सजा सुनाई थी।
गौरतलब है कि कोली और उसके मालिक मोहिंदर सिंह पंढेर को विशेष अदालत ने 13 फरवरी, 09 मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने 11 सितंबर, 09 को कोली की मौत की सजा को बरकरार रखा था और पंढेर को आरोपमुक्त कर दिया। इसके बाद मृतका के पिता ने पंढेर को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
पंढेर के घर के पास रहने वाली लड़की 2005 में अपने घर से लापता हो गई थी। नोएडा में पंढेर के घर के पीछे नरकंकाल मिलने के बाद निठारी का यह सनसनीखेज मामला सामने आया था।
फिलहाल सजा की तामील संभव नहीं
दोषी सुरिंदर कोली और उसके व्यवसायी मालिक मोहिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ निठारी कांड में कुल 16 मामले दर्ज हैं। कुल मामलों में से चार में अब तक कोली को मौत की सजा हो चुकी है और अन्य मामलों में ट्रायल अभी जारी है। और सभी मामलों में ट्रायल के पूरा होने तक फांसी की सजा को लागू किए जाने की संभावना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवकता डीके गर्ग के मुताबिक कोली के सभी अपराधों के ट्रायल जब तक पूरे नहीं होते। उसके खिलाफ मौत की सजा को लागू किए जाने की संभावना नहीं है। कयोंकि कोली के खिलाफ निठारी हत्याकांड के सभी मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिलहाल 12 मामले लंबित हैं।
प्रक्रिया के मुताबिक यदि उसे पहले सजा दे दी जाएगी तो अन्य मामलों के पीड़ितों के इंसाफ के लिए चल रहे मामले अधूरे रह जाएंगे। ऐसे में उनमें अंतिम फैसला आने तक फांसी दिया जाना संभव नहीं है।
निठारी मामले में 1990 से 1996 के दौरान रेणुका बाई बहनों, सीमा और उसकी मां व किरण शिंदे समेत 13 बच्चों के अपहरण का मामला है। हालांकि अभियोजन की ओर से अब तक सिर्फ पांच हत्याओं को साबित किया जा सका है।