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'जो धरना देगा उसी को मिलेगा विधानसभा टिकट'

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दिल्ली में अकबर रोड स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यालय में दिल्ली कांग्रेस के नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई गई।
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इसमें प्रदेश प्रभारी शकील अहमद व कुलजीत नागरा समेत दिल्ली के सभी कांग्रेसी विधायक व विधान सभा उम्मीदवार मौजूद थे।

सूत्रों की मानें तो बैठक में शकील अहमद ने दो-टूक शब्दों में कहा कि आगामी विधान सभा चुनाव में सिर्फ उन्हीं को टिकट मिलेगा, जो मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि इस दौरान विरोध के सुर भी सुने गए।

क्या टूटने वाली है कांग्रेस?

सूत्र बताते हैं कि सीलमपुर विधायक मतीन अहमद ने सीधा सवाल किया कि कांग्रेस ने इतने दिनों तक हमें कुछ भी नहीं दिया है। हालांकि न हमें पहले कभी पार्टी से उम्मीद की थी, न ही आगे है।

पहले भी निर्दलीय जीते थे और जनता का इतना भरोसा अभी भी बाकी है कि दुबारा निर्दलीय जीत सकते हैं। वहीं, अनिल चौधरी ने कहा कि दिल्ली में घटते जनाधार की बड़ी वजह दिल्ली सरकार के मंत्रियों का रवैया रहा है। सरकार में रहने के दौरान कांग्रेसी विधायकों की भी नहीं सुनी गई।

दूसरी तरफ मुस्तफाबाद के विधायक हसन अहमद ने कहा कि पार्टी अभी भी नहीं चेती है। इतने दिनों से छह विधायकों के टूटने की खबरें उड़ रही हैं, लेकिन किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी ने विधायकों से बात करने तक की जहमत नहीं उठाई।
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ये है दिल्ली में कांग्रेस के सफाए का कारण?

सूत्रों की मानें तो आलाकमान का संदेश बताते हुए शकील अहमद ने साफ-साफ कहा कि टिकट उसी को मिलेगा, जो अपने इलाके में सक्रिय होगा। नेताओं को जनता के बीच जाना होगा, उनसे बात करनी होगी।

आम लोगों से दूर होने की वजह से ही पार्टी को दिल्ली में शिकस्त खानी पड़ी है।

माना जा रहा है कि यह दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्रियों राजकुमार चौहान, एके वालिया समेत दूसरे पूर्व विधायकों के लिए चेतावनी हो सकती है, जो बिजली-पानी व महंगाई के खिलाफ चल रहे प्रर्दशन से किनारा किए हुए हैं।
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