ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन में गौतमबुद्ध नगर के 39 गांवों के 4000 से ज्यादा प्रभावित किसानों ने जमीन वापस लेने की घोषणा की है। किसानों का कहना है कि एनएचएआई द्वारा मेरठ-मुजफ्फरनगर में जितनी दरों पर मुआवजा दिया गया, उतना ही उन्हें चाहिए, लेकिन अब यह दूसरा विकल्प होगा।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे किसान कल्याण समिति के संरक्षक तेजा गुर्जर, संयोजक तेजपाल शास्त्री और अध्यक्ष धीरज सिंह के नेतृत्व में कई गांवों के लोगों ने समिति के बैनर तले प्रेसवार्ता की। इस दौरान किसानों ने 16 नवंबर को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन की घोषणा की।
वहीं, तेजा गुर्जर ने कहा 2009 में अधिग्रहण के दौरान हुए समझौते पूरे नहीं किए। तभी से आंदोलन जारी है, जिसकी वजह से प्रोजेक्ट की लागत 2600 करोड़ से 7600 करोड़ रुपये पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के यहां भी आपत्ति दर्ज की गई है।
जिलाधिकारी को ये साक्ष्य दिए कि नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने एनएच-58 के लिंक रोड का मेरठ में 5508 रुपये, मुजफ्फरनगर में 4250 रुपये और गौतमबुद्ध नगर के धूममानिकपुर में 5500 रुपये प्रति मीटर का मुआवजा दिया गया। इसके बाद यहां के किसानों को बराबरी का मुआवजा नहीं दिया जा रहा। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में मद्रास में अधिकतम मुआवजे का आदेश दिया हुआ है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
किसानों का कहना है कि 2013 भूमि अधिनियम के तहत पांच साल में प्रोजेक्ट शुरू हुआ ऐसे में अब जमीन वापस चाहिए। इसके चलते सिरसा, लड़पुरा, बंबाबड़, नई बस्ती, मिलक, अंधपुर और मायचा में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़ी कंपनियों के अधिकारियों को भगाकर कब्जा नहीं लेने दिया गया है।