दिल्ली के बीपीओ कर्मी से सामूहिक दुष्कर्म मामले में आरोपियों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपहरण व दुष्कर्म की धाराओं में दोषी ठहराया है। इन धाराओं के तहत इनको आजीवन कारावास तक की सजा मिल सकती है या कम से कम दस साल तक की सजा तय है।
विशेष कारण हो तभी इससे कम सजा हो सकती है। अगर यह वारदात वसंत विहार गैंग रेप 2012 के बाद हुई होती तो दोषियों को आजीवन कारावास या कम से कम 20 साल तक कैद की सजा हो सकती थी।
मवेशी चुराने दिल्ली आए थे पांचों
पांचों दोषी हरियाणा से दिल्ली मवेशी चुराने आए थे। वे दिल्ली से मवेशी चुराकर हरियाणा के मेवात क्षेत्र में बेचते थे। इसलिए उन्होंने महिंद्रा पिकअप खरीदी थी। दुष्कर्म वाली रात सभी ने शराब पी थी। इसके बाद जब वह मोतीबाग पहुंचे तो उन्होंने अपनी पिक अप के आगे टवेरा चलती हुई देखी। उसमें पिछली सीट पर लड़कियां बैठी थीं।
दोषियों ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। मोतीबाग गुरुद्वारा गुजरने के बाद रिंग रोड पर टवेरा ने दोनों लड़कियों को उतारा। इसके बाद शाहिद, कमरूद्दीन व शमशाद गाड़ी से उतरे और पीड़िता को पकड़ लिया। कमरूद्दीन ने पीड़िता पर कट्टा तानकर जबरन गाड़ी में डाल लिया था।
खुद को बचाने के लिए शाहिद ने किया था सरेंडर
सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए पांचों बदमाश मेवाती गैंग से हैं। इनमें उस्मान को हत्या के प्रयास में पहले भी सजा हो चुकी है।
दुष्कर्म के बाद पुलिस से खुद को बचाने के लिए शाहिद ने एक अन्य मामले में 26 नवंबर 2010 को फरीदाबाद कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी कर नीमका जेल से रिमांड पर लेने के बाद गिरफ्तार किया था।
अभियोजन पक्ष ने 57 गवाह पेश किए
आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 57 गवाह पेश किए थे। इनमें अभियोजन के गवाह नंबर तीन निलोय प्रमाणिक ने अपने बयान में कहा कि पीड़िता उसकी टीम में सीनियर कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव के तौर पर काम करती थी। उसके कार्यालय के एक अन्य अधिकारी ने उसे वारदात की जानकारी दी।
इसके बाद उसने पीड़िता के मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन पहली बार उसका फोन नहीं मिला। दूसरी बार में फोन कनेक्ट हो गया, लेकिन किसी ने बात नहीं की। इस दौरान उसे तीन-चार पुरुष व महिला की आवाज सुनाई दी। उसका फोन करीब 20-25 मिनट तक कनेक्ट रहा। इस दौरान पीड़िता के चीखने चिल्लाने और संघर्ष की आवाज आती रहीं।
आरोपी ने अपने बचाव में दिया था बयान
बचाव पक्ष ने दस गवाह पेश किए थे। इन गवाहों में आरोपियों के जानकार, ग्रामीण शामिल थे। इनमें गवाह नंबर दस खुद आरोपी उस्मान उर्फ काले था। उसने कहा कि उसे पुलिस ने एक दिसंबर 2010 की रात साढ़े आठ बजे मीरपुर स्थित उसके घर से उठाया था।
उसका आरोपी शाहिद के भाई से झगड़ा हुआ था और इस बाबत एफआईआर भी दर्ज हुई थी। उसने कहा कि उसकी शिनाख्त के दौरान थाने में दो दिसंबर को थाने में पीड़िता को दिखाया गया था, लेकिन पहली बार में पीड़िता ने उसे नहीं पहचाना। पीड़िता ने बाद में किसी के इशारे पर उसे पहचाना।