कांत एंक्लेव में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का लाइसेंस वर्ष 1974 में दिया गया था। बिल्डर ने यहां छोटे बड़े करीब 1600 प्लॉट काटे थे। वर्ष 1992 मेें सरकार ने इस जमीन को पीएलपीए के दायरे में शामिल कर लिया था। सामाजिक कार्यकर्ता एमसी मेहता ने संरक्षित क्षेत्र बताते हुए कांत एंक्लेव सहित काफी बड़े क्षेत्र को खाली करवाने की याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की थी।