वित्त विभाग का मानना है कि डीटीसी की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है। फ्री पास देने से दिल्ली सरकार पर सब्सिडी के तौर पर बोझ पड़ेगा। ऐसी हालत में फ्री पास योजना को लागू करने की सलाह नहीं दी जा सकती है। खासतौर से जब 2018-19 में दिल्ली सरकार के कर राजस्व में सिर्फ 2.54 फीसदी और 2019-20 के पहली तिमाही में 1.71 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
यही नहीं, अगर महिलाओं के लिए योजना लागू होती है तो वरिष्ठ नागरिक, छात्र व गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोग भी फ्री पास की मांग करेंगे। इसका असर सरकार पर भारी आर्थिक बोझ के तौर पर आएगा। वित्त विभाग की सलाह है कि योजना को गरीब व गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली महिलाओं तक सीमित किया जा सकता है।
मौजूदा बजट में नहीं है योजना का प्रावधान
वित्त विभाग का कहना है कि अगर दिल्ली कैबिनेट योजना को मंजूर करती है तो प्रशासनिक विभाग को तत्काल पर्याप्त बजट का इंतजाम करना होगा। इसकी वजह यह है कि 2019-20 के बजट में इस तरह की योजना का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में इसे नई सेवा के तौर पर देखा जाएगा। हालांकि, वित्त विभाग का मानना है कि योजना लागू होने पर विभाग पर्याप्त राशि का इंतजाम करेगा।
कैबिनेट नोट के ड्राफ्ट मुफ्त बिंदु
. महिलाओं का फ्री मासिक पास नहीं बनेगा, जितनी बार वे बस में चढ़ेंगी, परिचालक पिंक या येलो रंग का 10 रुपये का टिकट देगा।
. सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं को फ्री यात्रा के लिए देना पड़ेगा ट्रैवलिंग अलाउंस।
. सरकार पर सालाना करीब 360 करोड़ रुपये का पड़ेगा बोझ