अभी जिन मुद्दों को छात्रों के बीच उठा रहे हैं उनमें मेट्रो के रियायती पास, हर कॉलेज में एनसीसी, छात्राओं के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ, एससी-एसटी ओबीसी छात्रों की छात्रवृति में इजाफा, प्लेसमेंट सेल को बेहतर करने, हॉस्टल बनाने, हॉस्टल के दाखिले के लिए सेंट्रलाइज्ड पोर्टल बनाने के मुद्दे शामिल हैं। नए कॉलेज के मुद्दे भी शामिल होंगे।
कांग्रेस की छात्र शाखा नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) इस साल डीयू में सभी महिला छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश लागू करने के मुद्दे को लेकर चल रही है। एनएसयूआई की ओर से भी प्री कैंपेनिंग शुरु कर दी गई है। इसके लिए 12 से अधिक छात्रों को मैदान में उतारा गया है, जिनमें से चार को चुनाव लड़ाने के लिए चुना जाएगा। यह जमीनी स्तर पर छात्रों के मुद्दों को समझने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही महिला सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा रहेगा।
वहीं छात्र संगठन आइसा का मुख्य मुद्दा चुनाव को लोकतांत्रिक बनाने को लेकर है। आइसा सचिव अंजलि ने कहा कि हमारा मुद्दा है कि यूनिवर्सिटी में अच्छी व सस्ती शिक्षा मिले, क्योंकि हम छात्रों की शिक्षा और रहने के खर्च में बढ़ोतरी देख रहे हैं। हॉस्टल की कमी है, रूम रेंट कंट्रोल एक्ट नहीं है, इस मुद्दे को भी हम प्रमुखता से उठा रहे हैं। चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में आंतरिक मूल्यांकन को भी 45 फीसदी वेटेज दे दी गई है। यह भी कम किया जाना चाहिए। कैंपस में महिला सुरक्षा को लेकर जेंडर सेंसटाइजेशन वर्कशॉप आयोजित कराने का मुद्दा भी हमारे एजेंडे में है।
महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग को लेकर याचिका
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ की ओर से याचिका पर बुधवार को सुनवाई किए जाने की संभावना है। अधिवक्ता आशु बिधूड़ी द्वारा प्रतिनिधित्व की गई याचिकाकर्ता शबाना हुसैन ने कहा कि छात्रसंघ चुनावों में धन और बाहुबल का बहुत अधिक प्रभाव है जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है।