दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2022-23 से स्नातक की पढ़ाई चार साल की होगी। डीयू में बुधवार को अकादमिक काउंसिल की बैठक में अंडर ग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क को पास कर दिया गया। बैठक में सदस्यों ने क्रेडिट कम करने को लेकर विरोध जताया, बावजूद इसे पास कर दिया गया। 11 सदस्यों की ओर से लिखित आपति भी दर्ज कराई गई। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अंडर ग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क पर चर्चा करने के लिए बुधवार को अकादमिक काउंसिल की बैठक बुलाई गयी।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि नए पाठ्यक्रम को कैसे डिजाइन किया जाए जिससे कि शिक्षा नीति की सिफारिशों को सही प्रकार से लागू किया जा सके। सदस्यों की ओर से इसके लिए सुझाव भी मांगे। मालूम हो कि बीते 21 जनवरी को डीयू प्रशासन ने अंडर ग्रेजुएट करिकुलम 2022 तैयार किया था और इस पर सभी हितधारकों से अपने विचार देने को कहा था।
अकादमिक काउंसिल सदस्य सुधाशुं कुमार ने बताया कि बैठक में अंडर ग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क को पास कर दिया गया है। स्नातक की पढ़ाई अब चार साल की होगी। अब तक तीन वर्षीय ऑनर्स कोर्सेज में 148 क्रेडिट पढ़ाए जाते थे जिन्हें घटाकर 132 कर दिया गया है। इस तरह से अब 16 घंटे कम पढ़ाएंगे। वहीं 26 पेपर पढ़ाते थे जबकि अब 40 पेपर पढ़ाएंगे। साइंस में प्रैक्टिकल चार घंटे का होता था जो कि जिसका समय घटा कर दो घंटे का कर दिया गया है।
हिंदी भाषा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हिंदी ए, हिंदी बी और हिंदी सी को मिलाकर एक पेपर कर दिया गया है। इसके क्रेडिट 32 से घटाकर 22 कर दिए गए हैं। जबकि अंग्रेजी भाषा को वैल्यू ऐड कोर्स में जोड़ दिया है। इस तरह से अलग से अंग्रेजी पढ़ने की जरुरत नहीं। इससे अंग्रेजी विभाग का वर्कलोड करीब 30 फीसदी कम हो जाएगा। प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि बड़े बदलाव नहीं हो रहे जबकि यह बड़े बदलाव हैं। इस चार वर्षीय पढ़ाई के तहत एक साल का कोर्स पढ़ने वाले को सर्टिफिकेट, दो साल के लिए डिप्लोमा, तीन साल तक पढ़ने वाले को ऑनर्स और चार साल पढ़ाई पूरी करने वाले को ऑनर्स विद रिसर्च की डिग्री मिलेगी। चौथे साल में छात्रों को छह-छह महीने में दो रिसर्च पेपर लिखने होंगे।
सुधाशुं कुमार ने कहा कि यह सिस्टम लागू होने से नुकसान लैग्वेंज का होगा। विवि की ओर से 22 भाषाओं को बढ़ावा दिए जाने की बात कही जा रही है लेकिन इसके लिए शिक्षक कहां से आएंगे यह नहीं बताया जा रहा। वहीं शिक्षकों का वर्कलोड कम से उनकी नौकरी जाने का खतरा होगा। जबकि प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि शिक्षकों का वर्कलोड कम नहीं होने दिया जाएगा।