आरोपी के झांसे में आकर विपुल व उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने करीब 3.32 करोड़ रुपये निवेश कर दिए। बाद में मनीष ने ई-मेल के जरिए पीड़ित परिवार को बताया, निवेश की गई रकम से वह कई कंपनियों के शेयर खरीद रहे हैं, लेकिन उसके बाद कोई जानकारी नहीं मिलने पर शिकायतकर्ता विपुल ने छानबीन की तो पता चला कि आरोपियों ने किसी भी कंपनी के शेयर नहीं खरीदे हैं। आरोपियों ने सारे पैसों का गबन कर लिया है। पीड़ित ने पैसे वापस करने के लिए कहा, लेकिन आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। उसके बाद शाखा में इसकी शिकायत दी। पुलिस को पता चला कि पीड़ितों से रकम लेने के बाद आरोपियों ने सारे पैसे अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के बैंक खाते में जमा कर दिए।
शाखा की संयुक्त आयुक्त छाया शर्मा ने बताया कि पुलिस ने जांच के दौरान मनीष और उसके बेटे कपिल को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी जांच में शामिल नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करवाए। पुलिस ने कपिल को नौ जुलाई को जोधपुर से गिरफ्तार कर लिया।