पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोहम्मद नदीम सैफी ने रोहिणी जिला साइबर सेल में ठगी की शिकायत की। उसने बताया कि उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया। लिखा था कि आपका लोन स्वीकृत है और आप एप को लॉग इन कर दो लाख रुपये तक की सीमा चुन सकते हैं। शिकायतकर्ता ने लिंक का अनुसरण किया। उसने पूरा विवरण अपलोड किया। इसके कुछ देर बाद उनके नंबर पर व्हाट्सएप कॉल आया। उन्हें कंपनी के नियम की जानकारी देते हुए लोन की रकम का पांच फीसदी अग्रिम जमा करने के लिए कहा गया। साथ ही कहा गया कि यह रकम वापस कर दी जाएगी। पीड़ित ने तीन बार में दिए गए बैंक खातों में 10 हजार रुपये जमा कर दिए। उसके बाद से आरोपी ने व्हाट्सएप पर जवाब देना बंद कर दिया।
शिकायत पर साइबर सेल ने मामला दर्ज कर लिया और थाना प्रभारी अजय दलाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि ठगी गई रकम मध्य प्रदेश के नीमच स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर हुआ है। बैंक खाते की जांच में पता चला कि इन खातों में दो दिन में 75 लाख रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए हैं। इस रकम से क्रिप्टो करेंसी खरीदी जा रही है। पुलिस ने कुछ संदिग्धों की पहचान की। तकनीकी जांच में पुलिस को पता चला कि मुख्य आरोपी राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में मौजूद है। पुलिस ने नीमच से सुनील कुमार खटीक को गिरफ्तार करने के बाद मुख्य आरोपी दीपक पटवा समेत दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
चीन के जालसाज से मिलकर करते थे ठगी
दीपक ने बताया कि वह चीन के नागरिक के साथ मिलकर ठगी को अंजाम देते थे। वह इंस्टाग्राम पर कुछ चीनी नागरिकों के संपर्क में आया, जो ऑनलाइन लोन देने के बहाने लोगों से ठगी करते थे। दीपक ने उनसे ठगी के गुर सीखे और साथ मिलकर ठगी करने लगा। खाता मालिकों को खातों में आने वाले रकम का 1.5 फीसदी भुगतान करने की बात कहकर उनका बैंक खाता ले लेता था। फिर पंजीकृत सिम कार्ड भी प्राप्त कर लेता था।
आरोपी यूपीआई के माध्यम से अलग अलग बैंक खातों में रकम प्राप्त करता था। फिर बिनेंस क्रिप्टो एक्सचेंज से ठगी की रकम से यूएसडीटी खरीदकर उसे क्रिप्टो मुद्रा में परिवर्तित करता था और चीन के ठगों को देता था। दीपक पटवा ने बताया कि उसे यूएसडीटी में कमीशन मिलता था और बाद में उसे अपने खाते में या हवाला के जरिए भुना लेता था।
जांच में पता चला कि जिस व्हाट्सएप नंबर से ठगी की जाती थी उसका आईपी एड्रेस चीन का है। व्हाट्सएप नंबर से संवाद करने के लिए दीपक चीनी भाषा में प्राप्त संदेशों का गूगल ट्रांसलेटर की मदद से हिंदी में अनुवाद करता था और आगे गूगल ट्रांसलेटर की मदद से अपनी बातों को भेजता था। पुलिस इस धंधे से जुड़े अन्य आरोपियों और पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है।