देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए लगातार खतरनाक होती जा रही हैं। दिल्ली में इस वर्ष 31 जुलाई तक 2164 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 557 लोगों की जान चली गई और 1908 लोग गंभीर-सामान्य रूप से घायल हो गए। मरने वालों में सबसे बड़ी संख्या पैदल चलने वाले लोगों की है।
पैदल चलने वाले 239 लोगों को सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवानी पड़ी है। 193 मौतों के साथ सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में दोपहिया वाहन चालक दूसरे नंबर पर थे।
वाहनों में कौन सबसे ज्यादा रहा घातक
जिन वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं के कारण लोगों को सबसे ज्यादा जान गंवानी पड़ी है, उनमें निजी कारें सबसे ऊपर हैं। प्राइवेट कारों के कारण राजधानी में 78 दुर्घटनाएं हुईं और इनमें कुल 83 लोगों की जान गई।
इसके बाद स्कूटर या मोटर साइकिल जैसे दोपहिया वाहनों से 61 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कुल 63 लोगों की जान चली गई। भारी वाहनों से 45 दुर्घटनाओं में 47 लोगों की मौत हुई, तो टेंपो जैसे वाहनों से 27 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कुल 27 लोगों को मौत का शिकार भी होना पड़ा।
डीटीसी बसों से होने वाली दुर्घटनाओं में आई भारी कमी
दिल्ली कि डीटीसी बसें सड़क हादसों के कारण जानलेवा होने के नाते बदनाम थीं, लेकिन जब से लो-फ्लोर बसें आई हैं, इनसे होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस साल क्लस्टर बसों से 10 दुर्घटनाएं हुईं हैं, जिनमें 10 लोगों की मौत हुई, तो वहीं डीटीसी की बसों से छह दुर्घटनाएं हुईं जिनमें छह लोगों को ही अपनी जान गंवानी पड़ी। पहले यह संख्या सैकड़ों में हुआ करती थी।
वहीं, 262 सड़क दुर्घटनाएं ऐसी रहीं, जिनमें वाहन का पता नहीं चल सका यानी ये दुर्घटनाएं पुलिस की डायरी में ‘हिट एंड रन’ कैटेगरी में दर्ज की गई हैं। इस तरह के मामलों में 265 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। नए वाहनों में शुमार ई-रिक्शा और ग्रामीण सेवाओं से इस वर्ष केवल एक-एक दुर्घटनाएं हुईं हैं, जिनमें क्रमश: एक-एक व्यक्ति की मौत हुई।