अदालत ने दोषी दिनेश यादव उर्फ माइकल को दंगों के मामले में शामिल होने पर पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई, लेकिन दोषी के बेरोजगार व गरीब होने के अलावा उसके सुधरने की आशा को देखते हुए अधिक जुर्माना करने से इनकार कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के उस तर्क को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि इस मुकदमें पर अभियोजन पक्ष को 83 हजार रुपये का खर्च करना पड़ा है और उसकी वसूली की जानी चाहिए।
अदालत ने फिलहाल दोषी से वसूली जाने वाले 12 हजार रुपये जुर्माने को पीड़िता को अतिरिक्त मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने अपने फैसले में कहा कि दिल्ली कानूनी सेवा प्राधिकरणकी रिपोर्ट से स्पष्ट है कि दोषी के पास भुगतान करने की कोई क्षमता नहीं है। पीड़ित मनोरी देवी को कथित रूप से दंगों की घटना के कारण 4.50 लाख रुपये से 5 लाख रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन उसने अपने दावे को प्रमाणित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं किया। इसके अलावा पीड़िता को पहले ही दिल्ली सरकार से मुआवजे के रूप में 50 हजार रुपये की राशि मिल चुकी है।
अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष के पास यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि जिस गैरकानूनी सभा का दोषी सदस्य था, उसका गठन किसी साजिश के तहत किया गया था। अदालत ने माना कि दोषी पहली बार अपराध किया है और उसका अतीत साफ-सुथरा रहा है। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उसने सीधे हिंसा की घटना को अंजाम दिया था जिसमें पीड़ित मनोरी देवी के घर में तोड़फोड़ और आग लगा दी गई। दोषी को दी जाने वाली सजा तय करते समय उसकी कम उम्र को भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है। अदालत ने कहा दोषी बेरोजगार है, उसके नाम पर कोई चल या अचल संपत्ति नहीं है और उसकी कोई भुगतान क्षमता नहीं है।
भियोजन पक्ष के तर्क
विशेष अभियोजन अधिकारी ने अदालत को बताया कि दोषी उस गैरकानूनी सभा का सदस्य था जो एक साजिश के तहत बनाई गई थी। इनका उद्देश्य भारत को सबसे खराब स्थिति में बदनाम करने के लरए बड़े पैमाने पर अशांति पैदा करना था। उन्होंने बताया कि उक्त साजिश के तहत भड़की हिंसा में सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है और कई लोगों की जान चली गई है। दोषी अनुकरणीय सजा के लिए उत्तरदायी है। ऐसे में उसे अधिकतम संभव सजा दी जाए।
बचाव पक्ष के तर्क
दोषी के वकील ने उसके प्रति नरमी बरतने की अपील करते हुए बताया कि दोषी ने पहली बार अपराध किया है उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। दोषी जून 2020 से यानी डेढ़ साल से अधिक समय से हिरासत में है और उसने जेल में कैद से काफी सबक सीखा है। वहीं दोषी की गिरफ्तारी के 15 दिनों के बाद ही उसके पिता मृत्यु हो गई थी, जिसने अपराधी के दिमाग पर सुधारात्मक प्रभाव डाला है। इसके अलावा दोषी को हिंसा की किसी भी घटना में सीधे तौर पर शामिल नहीं पाया गया। दोषी ने पहले ही सुधार का रास्ता अपना लिया है और उस पर कोई भारी सजा थोपने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। वहीं दोषी ने कहा वह बेरोजगार है उसके परिवार के पास भागीरथी विहार दिल्ली में एक लाख रुपये की आवासीय संपत्ति है।