दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष सैफी ने सोमवार को तर्क दिया कि यदि यह एक सामान्य मामला होता तो अधिकांश अदालतें सबूतों को खारिज कर देतीं। सैफी ने कहा कि उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं है।
दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साजिश का आरोप लगाते यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य खालिद सैफी ने जमानत की मांग की है। सैफी ने सोमवार को तर्क दिया कि यदि यह एक सामान्य मामला होता तो अधिकांश अदालतें सबूतों को खारिज कर देतीं। सैफी ने कहा कि उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं है। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की विशेष पीठ के समक्ष खालिद सैफी की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सैफी की ओर से सीनियर एडवोकेट रेबेका एम. जॉन ने यह दलील दी।
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जॉन ने तर्क दिया अगर यह यूएपीए के बिना कोई सामान्य मामला होता तो मुझे संदेह है कि ज्यादातर अदालतें इस सबूत को खारिज कर देतीं क्योंकि गवाह ने घटना को तब उजागर किया जब उसका सामना जांच एजेंसी हुआ। यह ओपनियन एविडेंस के अलावा और कुछ नहीं है, जिस पर विश्वास नहीं दिया जा सकता। पीएफआई कार्यालय शाहीन बाग में खालिद सैफी और सह आरोपी उमर खालिद और ताहिर हुसैन की कथित मुलाकात के संबंध में एक गवाह के बयान का जिक्र करते हुए जॉन ने कहा कि गवाह इस बारे में कुछ नहीं कहता कि वहां क्या हुआ? उन्होंने कहा गवाह केवल यह कहता है कि इन तीन लोगों को एक कार्यालय में जाते देखा गया।