दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने पुलिस द्वारा तकनीकी आधार पर उनके जमानत आवेदन पर आपत्ति के बाद नई जमानत याचिका दायर की है। अदालत ने नई याचिका पर पुलिस को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष आरोपी खालिद की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने पुलिस की आपत्ति के बाद दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 439 के तहत जमानत मांगने वाले आवेदन को धारा 437 के तहत तब्दील कर दिया। अदालत ने पुलिस को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 8 सितंबर तय की है।
इससे पूर्व पुलिस की और से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने उस नई याचिका पर आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर अभियोजन पर 'लंबी रणनीति' अपनाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा आरोपी ने जो अंतरिम आवेदन दायर किया है उसमें यह आरोप गलत है कि अभियोजन पक्ष द्वारा की गई आपत्तियां देरी करने वाली रणनीति हैं। इसलिए, अभियोजन पक्ष पर लंबी रणनीति अपनाने का आरोप उचित नहीं है।
याची के अधिवक्ता ने नई जमानत याचिका दायर करते हुए तर्क रखा कि यह अदालत यूएपीए अधिनियम के तहत नामित एक विशेष अदालत है और इसलिए सीआरपीसी की धारा 437 के तहत सभी शक्तियों का प्रयोग कर करती है।
जमानत याचिका पर 3 सितंबर को हुई आखिरी सुनवाई में खालिद ने कोर्ट से कहा था कि मामले में आरोपपत्र में अतिशयोक्तिपूर्ण आरोप लगाए गए हैं। खालिद सहित कई अन्य लोगों पर इस मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन पर फरवरी 2020 की हिंसा का 'मास्टरमाइंड' होने का आरोप है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे।
हाल ही में मामले में आरोपी इशरत जहां व खालिद सैफी ने भी सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत आवेदन को तकनीति खामी मानते हुए धारा 437 के तहत आवेदन दायर किया था।