न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने आरोपी मोहम्मद सलीम खान को जमानत प्रदान की है जबकि मोहम्मद इब्राहिम को जमानत देने से इंकार कर दिया। इब्राहिम को हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या और दंगों के दौरान एक डीसीपी को सिर में चोट लगने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगो के दौरान कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में एक आरोपी को जमानत प्रदान कर दी। वहीं दूसरे आरोपी को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ साक्ष्य नजर आ रहे हैं।
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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने आरोपी मोहम्मद सलीम खान को जमानत प्रदान की है जबकि मोहम्मद इब्राहिम को जमानत देने से इंकार कर दिया। इब्राहिम को हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या और दंगों के दौरान एक डीसीपी को सिर में चोट लगने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने हाल ही में एक अन्य मामले में शाहनवाज और मोहम्मद अय्यूब को जमानत दे दी थी। वहीं सादिक और इरशाद अली को जमानत देने से इनकार कर दिया था। यह मामला एक कांस्टेबल के बयान पर दर्ज किया गया था।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि 24 फरवरी 2020 को वह चांद बाग इलाके में अन्य स्टाफ सदस्यों के साथ कानून व्यवस्था को बनाए रखने की ड्यूटी पर था। दोपहर एक बजे के करीब प्रदर्शनकारी डंडा, लाठी, बेसबॉल बैट, लोहे की छड़ और पत्थर लेकर मुख्य वजीराबाद रोड पर जमा होने लगे और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया, जिससे वे हिंसक हो गए। आगे कहा गया कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार चेतावनी देने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल और गैस के गोले दागे गए।
कांस्टेबल के मुताबिक, हिंसक प्रदर्शनकारियों ने लोगों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों को भी पीटना शुरू कर दिया। इससे उन्हें खुद अपनी दाहिनी कोहनी और हाथ में चोट लग गई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने डीसीपी शाहदरा, एसीपी गोकुलपुरी और हेड कांस्टेबल रतन लाल पर हमला किया। इससे वे सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां यह पाया गया कि एचसी रतन लाल की पहले ही चोटों के कारण मृत्यु हो चुकी थी और डीसीपी शाहदरा बेहोश थे और उन्हें सिर में चोटें आई थीं।