दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गिलानी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि गिलानी के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वो बेहद गंभीर और देशविरोधी हैं।
बता दें कि गिलानी को दिल्ली के प्रेस क्लब में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के समर्थन में नारे लगाने के आरोप में पुलिस ने 16 फरवरी को गिरफ्तार किया था।
गिलानी ने बेल के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसकी सुनवाई के दौरान पुलिस ने गिलानी पर गंभीर आरोपों के चलते बेल का विरोध किया। हालांकि कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को शनिवार के लिए टाल दिया है।
इससे पहले देशद्रोह के आरोपों में गिरफ्तार डीयू के प्रोफेसर एसएआर गिलानी को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) कार्यकारिणी की बैठक में बृहस्पतिसार को जमकर हंगामा हुआ। दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू हुई बैठक करीब छह घंटे चली।
गिलानी को समर्थन का प्रस्ताव डूटा कार्यकारिणी की बैठक में लाया जाए या नहीं, इस पर शिक्षक दो गुटों में बंटे नजर आए। हालांकि, दो सदस्यों के वॉकआउट और लंबी चर्चा के बाद 13 सदस्यों ने सर्वसम्मति से तीन प्रस्ताव पास किए। इनमें गिलानी का समर्थन, परिवार के साथ खड़े होने और देशद्रोह का केस हटाया जाना शामिल है।
इससे पहले डूटा कार्यकारिणी में मुद्दे को लाए जाने पर शिक्षक संगठन एनडीटीएफ के सदस्यों ने आपत्ति जताई। बैठक का दो सदस्यों ने वॉकआउट भी किया। डूटा अध्यक्ष नंदिता नारायण ने बताया कि 13 सदस्यों की सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया।