आरोपी अशबुल मंडल ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि उसका साथी मेरठ निवासी समीर अहमद दिल्ली एनसीआर से चोरी किए गए वाहनों को हैदराबाद में सप्लाई करते थे। बप्पा उसे एक वाहन को पहुंचाने के पांच हजार रुपये देता था। वह उसे वाहन की डिलीवरी लेने के लिए हैदराबाद फ्लाइट से भेजता था। इसके बाद इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह डागर की टीम ने बप्पा घोष को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर 84 सदरगंज बाजार, मेरठ, यूपी निवासी मो. साजिद को गिरफ्तार किया गया।
पश्चिमी यूपी के लिए वाहन खरीदता था
आरोपी बप्पा घोष उर्फ सोनू घोष ने खुलासा किया कि वह यूपी के मेरठ, मुरादबाद और बुलंदशहर में रहने वाले लोगों से 1000 से अधिक चोरी के वाहन खरीद चुका है। ये सभी यूपी के मेरठ और आसपास के इलाके से चुराए गए हैं।
फर्जी नंबर प्लेट लगाकर बदल देता था पहचान
बप्पा घोष ने शुरू में चोरी की कारें खरीदनी शुरू कीं और ऑटो लिफ्टरों के अंतरराज्यीय गिरोह का सदस्य बन गया। चोरी के वाहन की पहचान बार-बार बदलने के लिए वह अपनी कार में कई अन्य नंबर प्लेट रखता था। वह पहले भी चोरी के एक मामले में शामिल रहा है। इसके बाद वह अपने कॉमन दोस्तों के माध्यम से हैदराबाद में रहने वाले परिपूर्ण चारी के संपर्क में आया और हैदराबाद, बेंगलुरु, राजमंड्री आंध्र प्रदेश स्थित रिसीवरों को चोरी के वाहनों को बेचने लगा।