वाहन चालकों को सीएनजी तक के लिए भारी परेशानी हो सकती है। दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों की मानें तो अभी तक उन्हें इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। जबकि डीटीसी बसों के न चलने से सीधा भार मेट्रो पर पड़ेगा। हालांकि मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कोई स्थिति देखने को मिलती है तो तत्काल ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि हड़ताल में काली-पीली टैक्सी, टूरिस्ट टैक्सी और ओला-उबर कंपनियों के चालक भी शामिल होंगेे। प्रदर्शन में ओला-उबर कंपनियों के खिलाफ भी आवाज उठाई जाएगी, जो चालकों को गुलाम बनाकर काम करवा रही हैं।
ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल और चक्का जाम बढ़ाएंगे दिल्ली वासियों की मुसीबत
संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इस हड़ताल में सीटू, एटक, इंटक, भारतीय तिपहिया चालक संघ, दिल्ली ऑटो टैक्सी ग्रामीण सेवा चालक यूनियन, दिल्ली ऑटो तिपहिया ड्राइवर्स कांग्रेस, सर्वोदय तिपहिया चालक सोसाइटी, मोती नगर ऑटो रिक्शा चालक यूनियन, कार्यशील ऑटो टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन और दिल्ली पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूनियन, उत्तर-प्रदेश ट्रैवल ऑपरेटर एसोसिएशन, राजधानी परिवहन पंचायत, ऑल इंडिया टूर एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, राजधानी टूरिस्ट ड्राइवर यूनियन, भारतीय ड्राइवर एकता यूनियन, जयपुर वाहन चालक सेवा संस्था ज्वाइंट कॉउंसिल ऑफ लग्जरी टैक्सी, एसोसिएशन समेत अन्य यूनियनें शामिल हो रही हैं।
ये हैं मांगें
उन्होंने कहा उनकी मांगे है कि दिल्ली में एक फिटनेस पिट केन्द्र बनाया जाए जहां सभी उचित व्यवस्था हो, पूछो एप को तुरंत सक्रिय रूप से चालू किया जाए। चार सालों से निलंबित ऑटो वेलफेयर बोर्ड का गठन तत्काल स्तर पर किया जाए। उपराज्यपाल के राजपत्र के अनुसार किराया एसी और नॉन एसी टैक्सी चालकों को दिया जाए व सार्वजनिक किया जाए। सरकार द्वारा तय न्यूनतम किराया चालकों को मिले, ओला-उबर एग्रीगेटर एप कंपनियों का एप्लिकेशन सरकार से प्रमाणित हो।
ओला-उबर लीजिंग के नाम पर कंपनी भमासूम चालकों को लूटना बंद करें, लीज की गाडिय़ां चालकों के नाम करें। ड्राइवर की सुरक्षा की जिम्मेदारी और सरकार लें, यात्रियों का केवाईसी करवाएं। स्पीड गर्वनर सरकार या गाड़ियों की कंपिनयां लगवा कर दें। ओला कंपनी द्वारा 200 किमी प्रतिदिन की सीमा हटाई जाए, जुर्माना वापस किया जाए। दिल्ली नम्बर के माल वाहनों पर ग्रीन टैक्स के नाम पर लूट बंद की जाए। एप बेस्ड कंपनियों की कमीशन सरकार द्वारा अधिकतम 5 प्रतिशत तय की जाए। पेट्रोल-डीजल औरसीएनजी की बढ़ती कीमतों को कम किया जाए।
अपनी मांगों को लेकर चालक राजघाट पर एकत्रित होंगे और उसके बाद पीएम निवासी की ओर बढ़ेंगे। इस बीच सड़कों पर चक्का जाम करके अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा जाएगा। अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से जेल भरेंगे लेकिन विरोध समाप्त नहीं करेंगे।