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गजब, अब दिल्ली में बिना ड्राइवर के दौड़ेगी मेट्रो

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दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अपने थर्ड फेज में कुछ नया करने जा रही है। वर्ष-2016 में शुरू होने वाले दो रूटों पर डीएमआरसी बिना ड्राइवर के मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी है।
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नए ट्रैक पर दौड़ने वाले मेट्रो ट्रेन की स्पीड भी अब तक से सबसे ज्यादा होगी।

स्पीड बढ़ने से फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी तो यात्रियों को अधिक से अधिक ट्रेन मिलेंगी। नई लाइन पर लगभग पांच से छह लाख नए यात्री मिलने की संभावना है।

फायदा ही फायदा, बचेगा समय

फेज तीन की सबसे लंबी लाइन (58.4 किलोमीटर) मुकुंदपुर-शिव विहार (लाइन नंबर -7) और जनकपुरी वेस्ट से बॉटेनिकल गार्डन के बीच (दूरी-36.9 किलोमीटर, लाइन नंबर-8) चलने वाली इस चालक रहित ट्रेन की स्पीड और फ्रीक्वेंसी सबसे बेहतर होगी।

स्पीड व फ्रीक्वेंसी बढ़ने से यात्रा का समय भी कम हो जाएगा।

मसलन अगर ब्लू लाइन पर नोएडा सिटी सेंटर से द्वारका के बीच की दूरी एक घंटे पांच मिनट में तय की जा सकती है तो फेज-तीन शुरू होने के बाद में इतनी ही दूरी 55 या 50 मिनट में पूरी की जा सकेगी। यानी यात्रियों का दस से पंद्रह मिनट का समय बचेगा।

नए ट्रैक पर दौड़ेगी मेट्रो

डीएमआरसी अधिकारियों के मुताबिक, फेज एक और दो की लाइनों में सिग्नल बड़ी समस्या है। यह समस्या फेज तीन लाइन में यात्रियों को परेशान नहीं करेगी। क्योंकि दोनों लाइनों में महज कुछ स्थानों पर ही सिग्नल लगे होंगे।

डीएमआरसी नया कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (सीबीटीसी) लगा रहा है। सीबीटीसी तकनीक सिग्नल खत्म कर देगी और फिर लोकेशन, एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच की दूरी, प्लेटफार्म की लंबाई, स्पीड व मोड कंप्यूटराइज्ड हो जाने के चलते ट्रेन बिना चालक से आसानी से चल सकेगी।

सीबीटीसी तकनीक से स्पीड के साथ-साथ फ्रीक्वेंसी भी बढ़ेगी। साथ ही इसी तकनीक की मदद से ड्राइवर रहित ट्रेन का संचालन हो सकेगा।

कुछ ट्रेनों में रहेंगे ड्राइवर

मेट्रो ट्रेन के कोच के ऊपर लगने वाले पेंटोग्राफ (ट्रैक के ऊपर बिजली की हाई वोल्टेज लाइन को टच करने वाली मशीन या उपकरण) के डिजाइन में बदलाव किया गया है। फेज तीन में दौड़ने वाली ट्रेन के पहले, तीसरे, चौथे व छठे कोच में पेंटोग्राफ लगा होगा। यानी छह कोच की ट्रेन में कुल चार पेंटोग्राफ लगे होंगे।

डीएमआरसी में कम्युनिकेशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल ने बताया कि मेट्रो फेज तीन में यात्रियों को नई तकनीक का फायदा मिलेगा। ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (एटीपी) का स्थान कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (सीबीटीसी) लेने जा रही है।

तीसरे फेस में ड्राइवर के बगैर ट्रेन के संचालन की योजना है। हालांकि शुरुआत में कुछ ट्रेनों में ड्राइवर रहेंगे, लेकिन उसका काम दरवाजा खोलना व प्लेटफॉर्म पर भीड़ को देखना होगा।
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ये हैं फायदे

- सीबीटीसी व पेंटोग्राफ लगाने से ट्रेन फटाफट पिकअप लेते हुए पकड़ेगी स्पीड।
- फिलहाल मेट्रो की एवरेज स्पीड 35 किमी/ घंटा  है जो फेज तीन में 40 किमी/ घंटा हो जाएगी।
- बिना ड्राइवर होने पर प्लेटफार्म पर आने-जाने के समय ट्रेनों को रोकने व फिर से चलाने में लगने वाला टाइम बचेगा।
- स्पीड बढ़ने से फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी, यात्रियों को हर दो मिनट में मिलेगी ट्रेन की सुविधा।
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