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नए साल से दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशन होंगे कैशलेस

Sat, 24 Dec 2016 10:28 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने एक जनवरी से मेट्रो के 10 स्टेशन पर कैशलेस भुगतान सुविधा का एलान किया है। मंगू सिंह ने मेट्रो परिचालन के 14 वर्ष पूरे होने से पूर्व मीडिया से बातचीत में कहा कि नोटबंदी और डिजिटाइजेशन के दौर में पहले चरण में दस स्टेशन कैशलेस कर रहे हैं।
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ये ऐसे स्टेशन हैं जहां स्मार्टकार्ड प्रयोगकर्ता 70 फीसदी से अधिक हैं, मोबाइल की अच्छी कनेक्टिविटी होने के साथ दो या दो से अधिक टोकन वेंडिंग मशीनें भी लगाई जा रही हैं।

क्या होगा भुगतान का तरीका
चुनिंदा दस स्टेशनों पर यात्री को टोकन या स्मार्ट कार्ड खरीदने व रिचार्ज करने के लिए डेबिड-क्रेडिट कार्ड मशीनें लगाए जाने के अलावा पेटीएम की सुविधा होगी। पेटीएम भुगतान के लिए ग्राहक सेवा काउंटर पर जाकर अपने मोबाइल में स्थापित मोबाइल वॉयलेट से क्यूआर-कोड नंबर पर टोकन राशि का पता करके भुगतान करना होगा।
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एनसीआर के दो स्टेशन भी 1 जनवरी से होंगे कैशलेस

दिल्ली मेट्रो
ग्राहक सेवा प्रतिनिधि के मोबाइल पर एसएमएस आएगा जिसके बाद ग्राहक से उनके मोबाइल नंबर के अंतिम चार अंक पूछे जाएंगे और फिर सत्यापन के बाद टोकन या स्मार्टकार्ड दे दिया जाएगा।

अगर यात्रा नहीं करता है और 60 मिनट के अंदर टोकन वापस करता है तो मैन्युअल रसीद टोकन लेकर दी जाएगी जिसका भुगतान अगले चार कार्यदिवस में पेटीएम वॉलेट में वापस आ जाएगा।

एनसीआर के दो स्टेशन भी 1 जनवरी से होंगे कैशलेस
डीएमआरसी के अनुसार प्रथम चरण में कैशलेस के लिए एनसीआर में गुरुग्राम स्थित एमजी रोड स्टेशन और नोएडा स्थित नोएडा सेक्टर-15 का स्टेशन चुना गया है। इसके अलावा रोहिणी पूर्व और रोहिणी पश्चिम, मयूर विहार फेज-एक, निर्माण विहार, तिलक नगर, जनकपुरी पश्चिम, नेहरू प्लेस और कैलाश कालोनी स्टेशन 1 जनवरी, 2017 से कैशलेस होंगे। कीर्ति नगर से मुंडका लाइन का कोई भी स्टेशन अभी कैशलेस योजना में शामिल नहीं किया गया।

मंगू सिंह ने कहा अब रखरखाव है चुनौती
मंगू सिंह ने कहा कि ऑपरेशन के 14 साल हो गए हैं। ट्रैक, ट्रेन व नेटवर्क में अब रखरखाव की जरूरत बढ़ेगी। ऐसे में परचिालन चालू रहे और रखरखाव भी हो ये चुनौती है। इससे पहले बढ़ते खर्चे को सीमित रखने के लिए ऊर्जा बचत के उपाय किए और भीड़ को राहत देने के लिए जो कोच आए उनको जल्दी जोड़ा। फिर रखरखाव का प्रबंधन सिस्टम अध्ययन करके ऐसा बनाया गया कि ज्यादा से ज्यादा ट्रेन ट्रैक पर आए इसके प्रावधान पीक ऑवर में किए।
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