सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा के नेताओं ने आम आदमी पार्टी के पार्षदों की पृष्ठभूमि व पार्टी के प्रति निष्ठा का आकलन करने के बाद ही महापौर व उपमहापौर पद पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। भाजपा की आप में दूसरे दलों से गए पार्षदों के साथ-साथ आप के वादा करने के बावजूद पद नहीं देने और पद की ख्वाहिश पाले पार्षदों पर नजर है। वहीं चुनाव लड़ने के लिए आप से जुड़ पार्षदों को भी साधने की उसकी मंशा है।
सूत्र बताते है कि भाजपा नेताओं की नजर में दूसरे दलों से आप में गए पार्षदों को आसानी तोड़ा जा सकता है, क्योंकि वह एक बार फिर दलबदल कर सकते है। इसके अलावा उनको आप ने अपने साथ जोड़ने के दौरान एमसीडी में बड़े पद देने वादा किया था, लेकिन आप ने उनको कोई तवज्जो नहीं दी।
दूसरी ओर सूत्रों ने बताया कि भाजपा नेताओं की आप के उन पार्षदों पर भी नजर है जो महापौर, उपमहापौर व स्थायी समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य बनने की ख्वाहिश पाले हुए थे। दरअसल ये वर्षों से आप के साथ जुड़े हुए है और वे पार्टी को खड़ा करने के लिए दिन रात एक किए हुए थे। उनको उम्मीद थी कि एमसीडी में सरकार बनने पर बड़े पद मिलेंगे, मगर ऐसे सभी पार्षदों को बड़ा पद नहीं मिल रहा है। इसके अलावा भाजपा नेताओं को आप के उन पार्षदों के साथ आने का भरोसा है जिनका एमसीडी चुनाव से पहले आप से कोई वास्ता नहीं था।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा ने महापौर व उपमहापौर पर जीत हासिल करने के लिए अपने नेताओं को एमसीडी के जोन स्तर पर प्रभारी बनाया है। इन नेताओं ने रिपोर्ट तैयार करनी आरंभ कर दी है। वह एक-दो दिन में प्रदेश भाजपा को रिपोर्ट सौपेंगे। लिहाजा प्रदेश भाजपा ने महापौर व उपमहापौर चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है और वह वर्ष 2013 वाली गलती नहीं करना चाहती है। उस समय भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा दल होने के बावजूद सरकार नहीं बनाई थी और आम आदमी पार्टी ने भाजपा से कम सीटें होने के बावजूद सरकार बना ली थी और वह उस दौरान मिले अवसर का लाभ उठाते हुए लगातार दो बार विधानसभा चुनाव भारी बहुमत से जीत चुकी है।