गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए रुखसार जयपुर से दिल्ली आई थी। जयपुर में डॉक्टरों ने उसे जवाब दे दिया था। उनका कहना था कि जुड़वा बच्चों को जन्म देते समय बच्चों और उनकी मां के जीवन को खतरा हो सकता है। रुखसार के पिता अफजाल ने जब यह सुना तो फौरन उन्होंने अपने बेटे अजहर को रुखसार को लेने जयपुर भेज दिया। बाद में रुखसार को दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसने वहां सकुशल बच्चों को जन्म भी दे दिया।
अफजाल ने बताया कि शायद खुदा को कुछ ही मंजूर था। हादसे में रुखसार और उसके दूसरे बच्चे की मौत हो गई जबकि दोनों नवजातों के अलावा बाकी बच्चों की हालत भी नाजुक बनी हुई है। रोते हुए अफजाल व बाकी परिजनों का कहना था कि अल्लाह बस अब बाकी बच्चों को ठीक कर दे। रुखसार के तीन बच्चों की हालत देर रात तक नाजुक बनी हुई थी, जबकि बड़े बेटे सुभान की हालत में सुधार हुआ था।
रुखसार के भाई अजहर कुरैशी ने बताया कि पिछले रविवार 18 दिसंबर को रुखसार ने ठीक-ठाक एक बेटे व एक बेटी को जन्म दे दिया था। घर में सब लोग काफी खुश थे। परिवार ने नवजात बेटे का जुवाइन और बेटी का नाम जुवानिया रखा था। कई दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 25 दिसंबर रविवार को रुखसार की छुट्टी कर दी गई थी। परिवार उसे चितली कबर स्थित मायके में ले गया।
रुखसार की मां चमन बेगम अपने रिश्ते के भाई की शादी में शामिल होने के लिए रविवार को ही बेटे अजहर और दो बेटी अनम व साइमा के साथ अमरोहा चली गईं। यहां घर पर रुखसार के अलावा उसकी दो बहनें असमा उसके तीन बच्चे और छोटी बहन अरायना व पिता अफजाल मौजूद थे। सोमवार को ठंड अधिक होने की वजह से अफजाल ने रुखसार और उसके बच्चों को अंदर वाले कमरे में सोने के लिए कहा।
बाकी असमा और अरायना दूसरे कमरे में सो गई जबकि अफजाल दोनों कमरे के बाहर सो गए। तड़के अचानक तेज आवाज हुई तो रुखसार के कमरे की छत गिरने का पता चला। अजहर ने बताया कि उसे करीब 5.00 एक पड़ोसी दोस्त ने हादसे के बारे में बताया। वह अपनी मां और बहनों को लेकर दिल्ली के लिए निकल गया और सुबह 9.00 दिल्ली आ गया। घर में बहन और बच्चे की मौत की खबर के बाद से उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है।