कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आने के बाद स्कूल खोल दिए हैं। अब दिल्ली में भी स्कूलों-कॉलेजों को खोलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। दिल्ली में कोरोना वायरस के कम आ रहे हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार ने स्कूल-कॉलेज खोले जाएं या नहीं, इसको लेकर सुझाव मांगे हैं। सरकार अभिभावकों, शिक्षकों, छात्रों व आम जनता से सुझाव देने को कहा है। सुझावों के आधार पर ही सरकार स्कूल खोलने का निर्णय लेगी।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता में लोगों से स्कूल खोले जाने को लेकर सुझाव देने के लिए एक ईमेल आईडी delhischools21@gmail.com भी जारी किया है। लोगों के साथ-साथ इस ईमेल आईडी पर अभिभावक, विद्यार्थी, शिक्षक और प्रिंसिपल भी सुझाव दे सकते हैं। सरकार को प्राप्त सुझावों के आधार पर ही स्कूल खोलने के संबंध में फैसला लिया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में जारी पैरेंट्स-टीचर मीटिंग में जाने पर अभिभावकों में जिज्ञासा दिखी है कि स्कूल कब और कैसे खुलेंगे। अभिभावक, शिक्षक चाहतें हैं कि स्कूल खुले। लेकिन उनमें अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर डर है। कॉलेजों में पढने वाला यूथ भी कह रहा है कि उसकी कॉलेज की जिंदगी घर बैठ कर बीत रही है। बच्चों व युवाओं की सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल बंद रखने पड़ रहे हैं। अभिभावक जानना चाहते हैं कि स्कूल कब खुलेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में कोई निर्णय लें इससे पहले अभिभावक, शिक्षक, प्रिंसिपल व छात्र हमें बताएं कब और कैसे स्कूल खोले जाएं। यह सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में 75 हजार कोरोना टेस्ट हो रहे हैं उसके बावजूद 40-50-60 केस आ रहे हैं। इस तरह से दिल्ली में कोविड-19 की स्थिति नियंत्रण में है।
उन्होंने कहा कि जो भी सुझाव भेजे उसके साथ बच्चे का ब्यौरा व स्कूल का नाम लिखें। सरकार को बताएं कि स्कूल-कॉलेज खुलते हैं तो हमें कोरोना वायरस को लेकर क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
पीटीएम में अब तक पांच लाख अभिभावक पहुंचे
सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 19 जुलाई से 31 जुलाई तक पैरेंट्स टीचर मीटिंग(पीटीएम) है। इस मीटिंग में अब तक पांच लाख अभिभावक स्कूलों में शिक्षकों से मिल कर जा चुके हैं। वहां वह शिक्षकों से बच्चों की पढ़ाई को लेकर चर्चा कर रह हैं। यह देख कर अच्छा लग रहा है कि अभिभावक बच्चों की पढ़ाई में रुचि ले रहे हैं।