एफआईआर में आरोपी नंबर पांच विजय नायर
इस कथित शराब घोटाले में सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में विजय नायर आरोपी नंबर पांच है। साथ ही बताया गया कि उक्त घोटाले में नायर शामिल अधिकांश कंपनियों से जुड़ा है। विजय नायर के कई कॉमेडियन और शराब कंपनियों के साथ करीबी संबंध हैं। नायर 'ओनली मच लाउडर', 'बबलफिश' और 'मदर्सवियर' जैसी कंपनियों से जुड़ा है। मामले में कॉमेडियन वीर दास का भी नाम सामने आया है। नायर ने पहले आप की सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए हास्य कलाकार के तौर पर शिरकत की थी। फिर कुछ साल तक आम आदमी पार्टी का कम्युनिकेशन प्रभारी रहा।
'केजरीवाल का करीबी है विजय नायर'
ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में (23 मार्च) केजरीवाल की रिमांड मांगते समय तर्क दिया कि शराब घोटाले में गिरफ्तार बिचौलिया विजय नायर सीएम का करीबी है। वह केजरीवाल के लिए रिश्वत की रकम एकत्र करता था। आबकारी नीति लागू कराना और जो न माने उसे मनाने व धमकाने का काम भी नायर ही करता था। सरकारी गवाह दिनेश अरोड़ा ने कबूल किया है कि नायर के कहने पर उसने 31 करोड़ रुपये दिए थे।
शराब नीति मामले में अब तक गिरफ्तारी
विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, समीर महेंद्रू, पी सरथ चंद्रा, बिनोय बाबू, अमित अरोड़ा, गौतम मल्होत्रा, राघव मंगुटा, राजेश जोशी, अमन ढाल, अरुण पिल्लई, मनीष सिसोदिया, दिनेश अरोड़ा, संजय सिंह, के. कविता, अरविंद केजरीवाल।
नई शराब नीति क्या थी?
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई नीति लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा।
जांच कैसे शुरू हुई?
जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने आबकारी नीति में अनियमितता होने के संबंध में एक रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंपी थी। इसमें नीति में गड़बड़ी होने के साथ ही तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने नई आबकारी नीति (2021-22) के क्रियान्वयन में नियमों के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देकर 22 जुलाई, 22 को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस पर सीबीआई ने सिसोदिया समेत 15 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।