उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बाढ़ व सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नालों से गाद निकालने के लिए पार्शियल ग्रेविटेशनल डी-सिल्टिंग प्रणाली को अपनाएं। यह नई पद्धति न केवल स्थायी है बल्कि कम खर्च में गाद का निपटारा संभव है। नजफगढ़ ड्रेन में वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे डी-सिल्टिंग कार्यों का शनिवार को निरीक्षण करने के बाद ये निर्देश दिए। सफाई के बाद नजफगढ़ ड्रेन को इको टूरिज्म हब के तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि दिल्लीवासियों को बोटिंग, वाटर स्पोर्ट्स सहित दूसरी मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिल सके।
नालों की सफाई के लिए हाल ही में पार्शियल ग्रेविटेशनल डी-सिल्टिंग प्रणाली की शुरुआत की गई है। उपराज्यपाल को गुजरात के बंदरगाहों में ड्रेजिंग कार्यों का व्यापक अनुभव है। यह पहला मौका है जब किसी उपराज्यपाल ने नजफगढ़ ड्रेन में प्रवेश किया है। उपराज्यपाल ने इसी पद्धति के जरिये बंदरगाहों के ड्रेजिंग कार्यों को पारंपरिक पद्धति से गाद मुुक्त किया। सक्सेना ने पंजाबी बाग के नजदीक स्थित नाले (नजफगढ़ ड्रेन) में मोटर बोट द्वारा प्रवेश करीब एक घंटे तक एक किलो मीटर के दायरे में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया।