जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने इतिहास पुस्तकालय के बंद होने की अफवाहों को लेकर बयान जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इतिहास पुस्तकालय को बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि दूसरे भवन में शिफ्ट किया जा रहा है। कैंपस में छात्रों द्वारा अफवाह फैलायी जा रही है कि तमिल अध्ययन केंद्र के लिए इतिहास पुस्तकालय को बंद किया जा रहा है, लेकिन उसमें कोई सच्चाई नहीं है। इतिहास पुस्तकालय को दूसरे भवन में शिफ्ट किया जा रहा है। जबकि पुस्तकालय वाले भवन में तमिल अध्ययन केंद्र स्थापित किया जा रही है। यह फैसला विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव कांउसिल में लिया गया था।
जेएनयू एबीवीपी इकाई के अध्यक्ष उमेश चंद्र अजमीरा का कहना है कि हम जेएनयू प्रशासन के सीएचएस लाइब्रेरी को बंद करने के फैसले से बहुत निराश हैं। यह छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ी बाधा होगी। इससे भारतीय इतिहास के अध्ययन भी बाधित होगा। सीएचएस लाइब्रेरी जेएनयू में सबसे महत्वपूर्ण पुस्तकालयों में से एक है। यह पुस्तकालय भारतीय इतिहास, अध्ययनों और दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में एक समृद्ध संग्रह है। यह छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक मूल्यवान संसाधन है जो इन विषयों में रुचि रखते हैं। हम प्रशासन से यह अनुचित फैसला तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं। हम मांग करते हैं कि सीएचएस पुस्तकालय का नाम बदलकर महाकवि सुब्रमण्यम भारती को श्रद्धांजलि देते हुए उनके नाम पर किया जाए।