केजरीवाल की और से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वकीलों के साथ अतिरिक्त बैठकें करने से कोई नुकसान नहीं होगा। ईडी की और से पेश विशेष वकील की आपत्ति करने पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से केजरीवाल और जेल के बीच का है। इसमें केंद्रीय जांच एजेंसी को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि केजरीवाल के खिलाफ 35 मामले लंबित हैं, जिसके कारण उन्हें अपने वकीलों के साथ अतिरिक्त वर्चुअल मीटिंग करनी पड़ रही है। केजरीवाल ने पहले एक जुलाई के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित उनकी कानूनी टीम के साथ दो और वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।