दिल्ली उच्च न्यायालय ने आजाद हिन्द फौज के स्वतंत्रता सेनानी की विधवा बहू की पेंशन व आजीवन बकाया राशि की मांग को लेकर याचिका पर केंद्र और भारतीय स्टेट बैंक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची ने कहा पेंशन रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण उसकी मृत सास को भुगतान नहीं किए गए आजीवन बकाया को जारी करने का निर्देश दिया जाए।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी मनोहर सिंह व उनकी पत्नी कलावती देवी की बहू सुमन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है। याची ने कहा उनके ससुर मनोहर सिंह ने आजाद हिंद फौज यानि इंडियन नेशनल आर्मी (एनआईए) में काम किया था। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी को 1972 से पेंशन मिल रही थी और 1अगस्त 1980 को स्वतन्त्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना के तहत सभी स्वतंत्रता सेनानियों को पेंशन का लाभ अवधि बढ़ा दी गई।
याचिका के अनुसार यह विवादित नहीं है कि मनोहर सिंह की मृत्यु के बाद उनकी विधवा कलावती देवी को उक्त योजना के तहत पेंशन मिल रही थी, लेकिन 2015 में बिना कोई कारण बताए उनकी पेंशन रोक दी गई थी। अनपढ़ और लगभग 90 वर्ष की आयु होने के कारण वह इसका इंतजार करती रही लेकिन कभी कुछ नहीं हुआ।
अदालत ने उनके तर्क पर कहा कि प्रथम दृष्टया राय है कि कानूनी उत्तराधिकारियों को अवैतनिक पेंशन प्रदान की जानी चाहिए। 10 जून को गृह मंत्रालय ने कलावती देवी के लाइफ टाइम एरियर को बिना कोई कारण बताए जारी करने के याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज कर दिया।
याचिका में कहा गया है कि फरवरी 2015 से कलावती देव की पेंशन अचानक बिना कोई कारण बताए बंद कर दी गई और वह भी बिना किसी नोटिस या पूर्व सूचना के। जब भी वह संबंधित बैंक गई थीं, तो संबंधित अधिकारियों ने जवाब दिया कि मंत्रालय से पेंशन रोक दी गई है। लेकिन मंत्रालय द्वारा पारित ऐसा कोई आदेश उन्हें इस संबंध में कभी नहीं दिया गया था।
याचिका के अनुसार बाद में यह पाया गया कि आधार कार्ड पर स्वर्गीय मनोहर सिंह (स्वतंत्रता सेनानी) के नाम की गलत नाम प्रकाशित होने के आधार पर पेंशन रोक दी गई थी क्योंकि मनोहर सिंह के बजाय आधार कार्ड पर मोनबोर सिंह का नाम प्रकाशित हुआ था। उपरोक्त त्रुटि को सुधारने और गृह मंत्रालय के समक्ष कई ज्ञापन दिए गए लेकिन बकाया का भुगतान नहीं किया गया।