न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा कि यह विवाद में नहीं है कि शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता एक डेटिंग ऐप “हिंज” पर मिले थे, न कि किसी वैवाहिक ऐप पर। उनके बीच कई व्हाट्सएप संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है और किसी भी संदेश में याचिकाकर्ता द्वारा शादी का कोई वादा प्रस्ताव नहीं है।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने मुख्य परीक्षण में खुलासा किया था कि जब उसे पता चला कि याचिकाकर्ता ने उसकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में झूठ बोला है तब भी वह चार दिनों तक एयरबीएनबी में उसके साथ रही और बार-बार यौन संबंध बनाए।
अदालत ने कहा एफएसएल द्वारा याचिकाकर्ता के मोबाइल फोन से बरामद पीड़िता की अश्लील तस्वीरों और वीडियो के संबंध में पीड़िता ने अपनी जिरह में स्वीकार किया है कि ऐसी तस्वीरें और वीडियो उसकी सहमति से ली गई थीं। उपरोक्त तथ्यात्मक पृष्ठभूमि में प्रथम दृष्टया शारीरिक संबंध सहमति से हुआ प्रतीत होते है और ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि शादी का कोई झूठा वादा किया गया है या किसी तथ्य की गलत धारणा पर सहमति प्राप्त की गई है।
आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि वह और आरोपी हिंज पर मिले और प्यार हो गया। याचिकाकर्ता ने शुरू में आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री, यूके और न्यूजीलैंड से डबल मास्टर्स और किंग्स कॉलेज, लंदन से पीएचडी होने का दावा किया था, बाद में पता चला कि वह केवल बीएससी स्नातक था। शिकायतकर्ता महिला ने यह भी दावा किया कि उसने याचिकाकर्ता को उसके इलाज के लिए लगभग 1.2 करोड़ दिए थे।