दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को अपने एलएलबी पाठ्यक्रम के तहत सभी श्रेणी के रिक्त सीटों को दो सप्ताह के अंदर भरने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर मेधावी उम्मीदवारों की मौजूदगी के बाद भी ऐसे अग्रणी शिक्षण संस्थान में दाखिला नहीं मिलतो तो यह अनुचित है।
अदालत ने 3 फरवरी को जारी आदेश में कहा था कि अगर इस तरह के प्रतिष्ठित संस्थान में सीटों को भरने के लिए योग्यता के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं तो यह उम्मीदवारों के लिए अनुचित होगा। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता युवा छात्र हैं और प्रवेश परीक्षा को पास कर उन्होंने अपने धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है, इसलिए एलएलबी की डिग्री हासिल करने का मौका मिलना चाहिए।
विशेष तौर पर कोविड-19 महामारी के दौरान सभी क्षेत्रों पर विपरीत प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इन छात्रों को प्रवेश का मौका मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षा क्षेत्र को भी इस दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अदालत ने कहा कि 31 दिसंबर को अंतिम कट-ऑफ तारीख के सख्त पालन के आधार पर खाली सीटों को भरने पर विचार करने के लिए डीयू की अनिच्छा स्वीकार्य नहीं हे। विश्वविद्यालय ने न तो सूचना बुलेटिन में उल्लिखित कट-ऑफ तारीख या कुछ मामलों में प्रवेश को रद्द करने में दिशा निर्देशों का पालन किया। विधि संकाय(डीयू) में तीन वर्षीय एलएलबी कार्यक्रम में प्रवेश पाने के इच्छुक याचिकाकर्ता शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए थे।