दिल्ली हाईकोर्ट ने अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने के संबंध में दायर जनहित याचिका पर फिलहाल कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याची के उस तर्क पर संदेह जताया कि वे अफगानिस्तान में फंसे उन भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में हैं। अदालत ने कहा उसे उन भारतीयों का ब्योरा कैसे मिला।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने फिलहाल संबंधित अथारिटी को याचिका को बतौर ज्ञापन विचार करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता परमिन्द्र पाल सिंह ने दावा किया है कि अफगानिस्तान में 227 हिन्दू व सिख समुदाय के लोग फंसे हुए है और उनकोबतालिबान के हाथों जान और संपत्तियों का खतरा बना हुआ है।
पीठ ने सुनवाई के दौरान याची से पूछा कि आखिर उन्हें उन भारतीयों का ब्योरा कैसे मिला जिनको जान का खतरा है। याची के अधिवक्ता ने कहा कि वे अफगानिस्तान में फंसे उन भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में हैं तो पीठ ने कहा हमें इस तथ्य पर संदेह है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से उस सूची की प्रामाणिकता के बारे में सवाल किया जिसमें अफगानिस्तान में फंसे होने का दावा करने वाले व्यक्तियों का ब्योरा दिया गया था। जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ये विदेश मंत्रालय को सौंपी गई वीजा प्रतियों से हैं तो अदालत ने पूछा कि उन्हें कॉपियां कहां से मिलीं।
केंद्र सरकार के स्थायी वकील अमित महाजन ने कहा कि सरकार ने अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए सभी प्रयास किए हैं और कहा है कि अधिकारी याचिकाकर्ता को फंसे लोगों के ब्योरे का खुलासा नहीं करना चाहते।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गुरिंदर पाल सिंह ने कहा कि फंसे हुए व्यक्ति तालिबान के हाथों अपने जीवन और संपत्तियों के लिए लगातार खतरों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उन्हें अफगानिस्तान से भारत में निकालने और स्वदेश वापसी के लिए सहायता प्रदान करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। ऐसे में केंद्र सरकार को अफगानीस्तान में फंसे लोगों को सुरक्षा प्रदान करने और सुरक्षित भारत लाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाए।