हाईकोर्ट से इस साल 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्रों को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को मुश्किल प्रश्नों के लिए ग्रेस मार्क्स देने संबंधी अपनी मॉडरेशन पॉलिसी शैक्षणिक सत्र 2016-17 यानि इस वर्ष भी जारी रखने का आदेश दिया है।
इस पॉलिसी को खत्म करने के लिए हाल ही में सीबीएसई ने अधिसूचना जारी की थी, जिसे कुछ अभिभावकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अनुमान है कि इस फैसले से इस साल परीक्षा देने वाले 12वीं कक्षा के करीब 11 लाख छात्रों व 10वीं कक्षा के 9 लाख छात्रों को लाभ मिलेगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस वर्ष 12वीं कक्षा के लिए छात्र परीक्षा दें चुके हैं, ऐसे में यह पॉलिसी बदली नहीं जा सकती। अदालत ने कहा यदि पॉलिसी को खत्म किया जाता है तो बड़े स्तर पर छात्र प्रभावित होंगे। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में सीबीएसई को निर्देश दिया कि इस पॉलिसी को फिलहाल उन छात्रों के लिए जारी रखे जो इस वर्ष परीक्षा फार्म जमा कर चुके हैं।
अदालत ने कहा कि वे उन छात्रों को लगने वाले आघात से चिंतित है जिन्होंने परीक्षा दी है। बच्चों को यह जानने का अधिकार है कि आप (सीबीएसई) क्या कर रहे हैं शायद छात्र अधिक तनाव में हैं, आप असुरक्षा पैदा न करें। अदालत ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि मॉडरेशन नीति में बदलाव से उन छात्रों के लिए कठोर परिणाम हो सकते हैं जिन्होंने विदेशी विश्वविद्यालयों में पहले से ही प्रवेश फार्म भरा है और ऋण लिया है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वे सीबीएसई की नीति पर मैरिट पर नहीं जा रहे लेकिन इस नीति को छात्रों के हित में इस वर्ष रद नहीं किया जा सकता।
अदालत अभिभावकों व कुछ अधिवक्ताओं द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बलवीर सिंह ने कहा कि सीबीएसई ने ग्रेस माक्र्स देने संबंधी अपनी मॉडरेशन पॉलिसी को खत्म करने का फैसला लिया है। यह गलत है और इससे 12वीं कक्षा के उन छात्रों पर खासतौर पर असर पड़ेगा जिन्होंने विदेशों में दाखिले के लिए आवेदन किया है।