न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा यह एक स्पष्ट मामला है जहां पत्नी ने अपीलकर्ता पति की ओर से कोई भी कार्य या गलती किए बिना समय-समय पर वैवाहिक घर छोड़ दिया। पत्नी द्वारा समय-समय पर इस तरह की वापसी मानसिक क्रूरता का कार्य है, जिसका अपीलकर्ता को बिना किसी कारण या औचित्य के सामना करना पड़ा।
पीठ ने कहा कि विवाह आपसी सहयोग, समर्पण और निष्ठा की उपजाऊ भूमि पर फलता-फूलता है, लेकिन निरंतर तूफान की तरह बार-बार अलग होने की हरकतें केवल इसकी नींव को उखाड़ देती हैं और संघ की पवित्रता को खतरे में डालती हैं।