पीठ ने संबंधित डीसीपी को निर्देश दिया कि वह लापता बच्ची का पता लगाने, उसे बरामद करने और जल्द से जल्द अदालत के सामने पेश करने के लिए एक एसआईटी का गठन करे।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को एक 12 वर्षीय लापता लड़की का पता लगाकर अदालत के समक्ष पेश करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है। लड़की के माता-पिता ने संदेह जताया है कि वह अवैध हिरासत में है या उसकी तस्करी की गई है।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा कि बच्ची को शीघ्रता से अदालत में पेश किया जाना चाहिए और मामले की जांच दिल्ली पुलिस की मानव तस्करी रोधी इकाई को स्थानांतरित कर दी जाए। अदालत ने कहा एसआईटी की निगरानी संबंधित पुलिस उपायुक्त करेंगे।
पीठ ने संबंधित डीसीपी को निर्देश दिया कि वह लापता बच्ची का पता लगाने, उसे बरामद करने और जल्द से जल्द अदालत के सामने पेश करने के लिए एक एसआईटी का गठन करे। अदालत लड़की के माता-पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही है, जो नेपाल में रहते है। याचिका में माता-पिता ने दावा किया कि उनकी भाभी अक्सर उनके घर आती थीं। ननद ने उन्हें बेहतर परवरिश और पढ़ाई के लिए अपनी बेटी को अपने साथ दिल्ली भेजने को कहा। याचिका में कहा गया है कि लड़की पिछले साल अगस्त में शाहीन बाग में अपने केयरटेकर के घर से लापता हो गई थी।
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उन्होंने कहा कि भाभी के पति ने लड़की के खिलाफ चोरी का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। जब उसके माता-पिता ने उस व्यक्ति के पास पहुंचने की कोशिश की तो उसने कहा कि वे अपनी बेटी को पा लेंगे लेकिन चार-पांच साल बाद। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनकी बेटी को भाभी और उनके पति द्वारा भारत या विदेश में किसी के लिए तस्करी कर लाया गया है या उनकी अवैध हिरासत में है।