उन्होंने बताया कि अभियान के तहत चर्चा करने के लिए पूसा संस्थान के विशेषज्ञों के साथ 25 अप्रैल को गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। वहीं दिल्ली सरकार को जिला पर्यावरण संरक्षण समिति का गठन करने के लिए सुझाव मिले हैं। यह समिति वार्डों में प्रदूषण से संबंधित परेशानी का आकलन नगर निगम के वार्ड स्तर पर करेगी। इस तरह वार्ड स्तरीय पर्यावरण कार्य योजना तैयार करने वाला दिल्ली देश का पहला राज्य बनेगा।
उन्होंने कहा कि हमारा मकसद पर्यावरण संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाना है। इस समिति में आरडब्ल्यूए, एनजीओ के सदस्य, पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले लोग और विधायकों एवं पार्षदों के प्रतिनिधि होंगे। उन्होंने कहा कि गोलमेज सम्मेलन में समिति गठित करने को लेकर चर्चा की जाएगी। समिति शहरी खेती के लिए व्यापक अभियान में भी शामिल रहेगी। दरअसल ठंड के मौसम में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है।
दिल्ली में खेती योग्य भूमि लगातार कम होती जा रही है और कंक्रीट के बिल्डिंग्स की संख्या बढ़ती जा रही है। इसलिए दिल्ली में आने वाले समय में जमीन की कमी की संभावना बढ़ रही है और इसी के मद्देनजर दिल्ली सरकार शहरी खेती का मेगा प्लान शुरू करने जा रही है। इस मेगा प्लान का मकसद लोगों को अपने घरों की छतों, बॉलकनी और बरामदों में अपने उपयोग की सब्जियां व फल इत्यादि का उत्पादन करने के प्रति प्रोत्साहित करना है।